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पुर्तगाल में बुर्का-नकाब पर बड़ा फैसला, सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने पर रोक; जानें क्या है नया कानून?

इस कानून के अनुसार सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने पर रोक रहेगी। इसका असर खास तौर पर बुर्का और नकाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं पर पड़ सकता है।

Published by
Mahak Singh

यूरोपीय देश पुर्तगाल में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने को लेकर नया कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति एंटोनियो जोस सेगुरो ने इस कानून को मंजूरी दे दी है। स्थानीय मीडिया में इसे ‘बुर्का कानून’ कहा जा रहा है। कानून का नाम भले ही बुर्का से जुड़ा हो, लेकिन इसमें किसी खास धर्म का नाम नहीं लिया गया है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिनसे किसी व्यक्ति का चेहरा छिप जाए या उसकी पहचान करना मुश्किल हो।

क्या है पुर्तगाल का बुर्का कानून?

इस कानून के अनुसार सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने पर रोक रहेगी। इसका असर खास तौर पर बुर्का और नकाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं पर पड़ सकता है। साथ ही किसी व्यक्ति को धर्म, लिंग, उम्र या उसके मूल के आधार पर चेहरा ढकने के लिए मजबूर करना भी अपराध माना गया है। कानून को जुलाई में पुर्तगाल की संसद ने मंजूरी दी थी। इसे सत्ताधारी दक्षिणपंथी गठबंधन और अति-दक्षिणपंथी पार्टी चेगा का समर्थन मिला, जबकि कई वामपंथी दलों ने इसका विरोध किया। नए कानून का उल्लंघन करने वालों पर 150 से 3,000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, हर स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा। स्वास्थ्य संबंधी जरूरत, पेशेवर काम, कला या मौसम से बचने जैसी परिस्थितियों में चेहरे को ढकने की अनुमति होगी। पूजा स्थलों, राजनयिक मिशनों और विमानों में भी इस नियम से छूट दी गई है।

राष्ट्रपति एंटोनियो जोस सेगुरो ने इस फैसले को मंजूरी देते हुए कहा कि चेहरा इंसान की पहचान और एक-दूसरे से बातचीत का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह भी माना कि चेहरा ढकने का मुद्दा सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच पहचान और आपसी संवाद महत्वपूर्ण हैं। इस कानून को लेकर पुर्तगाल में राजनीतिक बहस भी तेज है। विरोध करने वाले दलों और अधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे नियम महिलाओं की व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। उनका तर्क है कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए, इस पर कानून बनाना उसके अधिकारों में दखल हो सकता है। वहीं कानून के समर्थक इसे सुरक्षा, पहचान और सामाजिक मेल-जोल से जोड़कर देखते हैं।

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