रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं। लंबे आंदोलन के बाद सरकार के आश्वासन पर धरना स्थगित करने वाले छात्रों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर सरकार ने भरोसा दिलाया था, उनकी कानूनी लड़ाई में सरकार का पक्ष मजबूती से सामने नहीं रखा जा रहा है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने शुक्रवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में सरकार का पुतला दहन करने की घोषणा की है। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में छात्रों ने इसे सरकार के खिलाफ विरोध के अगले चरण के तौर पर बताया।
उल्लेखनीय है कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा सुधार की मांग को लेकर छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब 26 दिनों तक धरना और भूख हड़ताल पर बैठे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की सीबीआइ जांच शामिल है।
छात्र नेताओं के मुताबिक, आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कई मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद छात्रों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन स्थगित किया और सरकार को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए समय दिया। छात्रों की नाराजगी उस समय और बढ़ गई, जब रद्द की गई परीक्षाओं से संबंधित मामला झारखंड उच्च न्यायालय पहुंचा।
सरकार ने प्रभावी तरीके से बचाव नहीं किया
आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले और उससे जुड़े तथ्यों का प्रभावी तरीके से बचाव नहीं किया गया। छात्र नेताओं ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई की और कई परीक्षाओं को रद्द किया, तो अदालत में इस फैसले के पीछे के आधार को मजबूती से क्यों नहीं रखा गया।
छात्रों ने साफ किया है कि यदि जेपीएससी-सीजीएल और अन्य संबंधित मामलों की सुनवाई में सरकार का रवैया नहीं बदला, तो आंदोलन दोबारा बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकता है। छात्र नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ी तो राज्यभर से छात्रों को रांची बुलाया जाएगा और जेल भरो आंदोलन भी किया जाएगा।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने इसे आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत बताते हुए बड़े पैमाने पर ‘उलगुलान’ की चेतावनी दी है।

















