मनीलाइफ इंडिया ने एक लेख में कहा था कि बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 के तहत पुलिस अदालत के आदेश के बिना बैंक रिकॉर्ड ले सकती है। इससे बैंक ग्राहकों की वित्तीय जानकारी गलत तरीके से खुलने का खतरा बढ़ जाता है और रिकॉर्ड मांगने की जरूरत पर कोई अदालती जांच भी नहीं होती।
पीआईबी का साफ जवाब
पीआईबी फैक्ट चेक ने इन दावों को भ्रामक बताया है।
पुलिस को कोई नया अधिकार नहीं
बिल पुलिस को कोई नया अधिकार नहीं देता। यह सिर्फ इतना कहता है कि पुलिस जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत जांच या पूछताछ कर रही हो, तो बैंक रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी मूल रिकॉर्ड की जगह पेश की जा सकती है और स्वीकार की जा सकती है।
An article by @MoneylifeIndia claims that under the Bankers' Books Evidence Bill, 2026, police can access bank records without a court order, leaving bank customers with no protection against wrongful disclosure of financial data and that there is no judicial assessment of the… pic.twitter.com/FYOxXQudbp
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) August 6, 2026
मूल रिकॉर्ड की जगह कॉपी काफी
बिल साफ करता है कि ऐसी जांच या पूछताछ में पुलिस बैंक से मूल रिकॉर्ड लाने पर जोर नहीं दे सकती। सर्टिफाइड कॉपी ही पर्याप्त मानी जाएगी।
अदालती मामलों में क्या नियम है
अदालती कामकाज में बैंक रिकॉर्ड की जांच या सर्टिफाइड कॉपी तभी दी जा सकती है जब कोई अदालत, जो न्यायिक काम कर रही हो, कानूनी आदेश दे।
बैंक विरोध भी कर सकता है
बिल में बैंक को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह अपने रिकॉर्ड की जांच या कॉपी देने के किसी निर्देश का विरोध कर सकता है। ऐसे में अदालत को बैंक की बात सुनने के बाद ही आगे का आदेश देना होगा। एजेंसी का कहना है कि ये बिल मुख्य रूप से बैंक रिकॉर्ड को डिजिटल और आधुनिक रूप में सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने का रास्ता आसान बनाता है।

















