
डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका में पढ़ने और वहाँ नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है। ट्रंप प्रशासन ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम पर $100,000 (करीब ₹95 लाख) की फीस लगाने पर विचार कर रहा है। यह F-1 स्टूडेंट वीजा का एक्सटेंशन है, जो ग्रेजुएशन के बाद काम करने की अनुमति देता है।
अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है, लेकिन अगर लागू हुआ तो भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि वे अमेरिका में सबसे बड़ी संख्या में पढ़ते और OPT का इस्तेमाल करते हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, होमलैंड सुरक्षा विभाग(DHS) इस फीस पर चर्चा कर रहा है। यह फीस OPT का इस्तेमाल करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियों पर लग सकती है। अभी तय नहीं है कि कौन भरेगा।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे लीगल इमिग्रेशन सिस्टम की सुरक्षा के लिए हर टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। DHS की प्रवक्ता ने कहा कि कोई भी पॉलिसी तब तक फाइनल नहीं मानी जाएगी जब तक आधिकारिक रूप से घोषणा न हो। यह प्रस्ताव H-1B वीजा पर $100,000 फीस लगाने के बाद आया है, जिसे अदालत ने रोक दिया था।
OPT अंतरराष्ट्रीय छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अपने पढ़े विषय से जुड़े क्षेत्र में काम करने की अनुमति देता है।
इसके बिना ज्यादातर छात्र ग्रेजुएशन के तुरंत बाद देश छोड़ने को मजबूर हो जाते। OPT अक्सर H-1B वीजा की राह भी खोलता है। 2024 में करीब 4.19 लाख अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट OPT के जरिए काम कर रहे थे।
यह प्रोग्राम ही अमेरिका को पढ़ने के लिए आकर्षक बनाता है, क्योंकि पढ़ाई के बाद काम का अनुभव और कमाई का मौका मिलता है।
2024-25 में अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में 3.63 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ रहे थे — जो सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब एक तिहाई है। चीन से भी ज्यादा। उसी साल लगभग 98,000 भारतीय छात्र OPT पर काम कर रहे थे।
भारतीय परिवार अक्सर भारी एजुकेशन लोन लेकर बच्चे को अमेरिका भेजते हैं। उम्मीद होती है कि बच्चा पढ़ाई पूरी करके वहाँ काम करेगा, अच्छी सैलरी कमाएगा और लोन चुकाएगा। $100,000 की अतिरिक्त फीस इस गणित को बिगाड़ देगी। कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इससे भारतीय छात्र ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसी दूसरी जगहों की तरफ रुख कर सकते हैं। इससे अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को भी नुकसान होगा क्योंकि वे भारतीय छात्रों की फीस पर काफी निर्भर हैं। टेक और फाइनेंस कंपनियां भी स्किल्ड ग्रेजुएट्स को OPT के जरिए हायर करती हैं, फिर H-1B स्पॉन्सर करती हैं।
ट्रंप का फोकस लीगल इमिग्रेशन को सीमित करने पर है। उनके दूसरे टर्म में स्टूडेंट वीजा पर सख्ती, H-1B में बदलाव और OPT पर और सुधार आने वाले हैं।कुछ लोग मानते हैं कि OPT कंपनियों को अमेरिकी नागरिकों से कम सैलरी पर विदेशी छात्रों को रखने देता है। स्टीफन मिलर जैसे सलाहकार पहले भी STEM OPT खत्म करने की बात कर चुके हैं।अभी स्थिति अनिश्चित है। छात्र, परिवार और यूनिवर्सिटीज इस प्रस्ताव पर नजर रखे हुए हैं। यह बदलाव अगर हुआ तो अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने का पूरा पैटर्न प्रभावित हो सकता है।