बिहार

किशनगंज में बांग्लादेशी घुसपैठ का बड़ा खुलासा: फर्जी आधार सहित कई दस्तावेज बरामद

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महिनगांव निवासी जाकिर हुसैन तथा बांग्लादेश के शरियतपुर निवासी हसन शेख उर्फ असनउल्ला के रूप में हुई

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सुबोध कुमार साहा

किशनगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे किशनगंज जिले में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दो बांग्लादेशी नागरिकों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कई संदिग्ध एवं फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तकनीकी जांच में जुटी है। मामले को सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

प्रभारी पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला को रविवार को गुप्त सूचना मिली थी कि नगर थाना क्षेत्र में कुछ विदेशी नागरिक संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (किशनगंज-1), नगर थानाध्यक्ष और डीआईयू की संयुक्त विशेष टीम गठित कर प्रेमपुल के समीप सघन वाहन जांच अभियान चलाया गया।

जांच के दौरान एक मोटरसाइकिल सवार पुलिस को देखकर भागने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया। पूछताछ में गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान महिनगांव निवासी जाकिर हुसैन (24) तथा बांग्लादेश के शरियतपुर निवासी हसन शेख उर्फ असनउल्ला मल (32) के रूप में हुई। हसन शेख भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। तलाशी के दौरान उसके पास से कई कथित फर्जी दस्तावेज बरामद हुए।

बीवी भी बांग्लादेशी नागरिक

पूछताछ में हसन शेख ने खुलासा किया कि उसकी पत्नी तैयबा इस्लाम उर्फ तंजिला अख्तर (28) भी बांग्लादेश की नागरिक है और वह अवैध रूप से किशनगंज में रह रही है। पुलिस ने छापेमारी कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में दोनों बांग्लादेशी नागरिकों के भारत में अवैध रूप से रहने की पुष्टि होने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में किशनगंज थाना कांड संख्या 839/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), फॉरेनर्स एक्ट, आधार एक्ट तथा पासपोर्ट एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद फर्जी दस्तावेजों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की डीआईयू द्वारा तकनीकी जांच की जा रही है। यह भी खंगाला जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी संगठित गिरोह, फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट या अवैध घुसपैठ नेटवर्क से तो नहीं है। मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और जल्द ही बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

घुसपैठ का बड़ा नेटवर्क

सीमावर्ती जिले किशनगंज में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर सीमा पार से अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान पत्रों के सहारे भारत में रह रहे संदिग्ध लोगों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की हर पहलू से जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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