स्वामी लक्ष्मणानंद पुस्तक विमोचन: दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- भारत में कभी सफल नहीं होंगे धर्मरक्षकों को दबाने के प्रयास
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होम भारत ओडिशा

स्वामी लक्ष्मणानंद पुस्तक विमोचन: दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- भारत में कभी सफल नहीं होंगे धर्मरक्षकों को दबाने के प्रयास

ओडिशा में धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान देने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या यदि आततायियों द्वारा की जाती है तो अनेक लक्ष्मणानंद सरस्वती पैदा होगें व धर्म व राष्ट्र के कार्य को आगे बढायेंगे क्योंकि यह मृत्युंजयी भारत और अविनाशी भारत है ।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jul 29, 2026, 10:17 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है भारत में धर्म जागृति, धर्म की रक्षा तथा समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों को शारीरिक रुप से समाप्त करने से यह कार्य रुक जाएगा भारत में यह संभव नहीं है । इस तरह से कृत्यों से भारत न झुकेगा न रुकेगा । ओडिशा में धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान देने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या यदि आततायियों द्वारा की जाती है तो अनेक लक्ष्मणानंद सरस्वती पैदा होगें व धर्म व राष्ट्र के कार्य को आगे बढायेंगे क्योंकि यह मृत्युंजयी भारत और अविनाशी भारत है ।

यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने मंगलवार को भुवनेश्वर स्थित रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती: कृति एवं व्यक्तित्व’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के न्यासी मनसुख लाल सेठिया ने किया।

धर्म के लिए बलिदान की भारत में रही है गौरवशाली परंपरा
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान देने की एक लंबी परंपरा रही है। गुरु तेग बहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लोगों पर हमले होते रहे हैं। केरल में वामपंथी हिंसा और कई राज्यों में नक्सली हिंसा के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं राष्ट्रसेवा के कार्य को रोक नहीं सकतीं। इसके विपरीत, ऐसी परिस्थितियां और अधिक लोगों को समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।

समाज सेवा और धर्म रक्षा के लिए समर्पित था स्वामीजी का जीवन
होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने अपना पूरा जीवन धर्म रक्षा, समाज संगठन और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने स्वयं कार्य करने के साथ-साथ हजारों ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार किया, जो आज भी उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामीजी पर लिखी गई यह पुस्तक केवल प्रशंसा का ग्रंथ नहीं है, बल्कि उनके जीवन, विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेने का माध्यम है।

यह पुस्तक समाज को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्य की आवश्यकता इसलिए है ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान दे सके।

आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम थे स्वामीजी
होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने सांसारिक जीवन और मोह-माया का त्याग कर अपना पूरा जीवन वनवासी समाज के उत्थान, गो संरक्षण, धर्म जागरण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज के दुख-दर्द को दूर करने और लोगों को मूल्यों एवं संस्कारों के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस पुस्तक के लिए लिखी अपने संदेश में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के लिए “वीर” और “तपस्वी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का सटीक परिचय देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दो प्रकार के महापुरुष होते हैं जो सूर्य मंडल को भेद सकते हैं । इनमें एक वे, जो अपने तप और साधना से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं अर्थात योगी , और दूसरे वे, जो राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त होते हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ये दोनों थे । वे उच्च आध्यात्मिक विभुति होने के साथ साथ उन्होंने धर्म, समाज व राष्ट्र के लिए बलिदान दिया । उनके जीवन में ये दोनों गुण एक साथ दिखाई देते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती
होसबाले ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों और जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। उन्होंने कहा कि स्वामीजी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और राष्ट्र जीवन को प्रेरित करने वाली शक्ति हैं। उनकी जीवनी नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कारों को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष के कार्य का मूल्यांकन करने का मापदंड क्या है । उनके चले जाने का बाद उनकी छाया कितने वर्ष , कितने दशकों दूर तक आगामी पीढियों तक प्रेरणा देती है । स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती भी एक ऐसे महापुरुष हैं जिनसे अनेक पीढी प्रेरणा लेते रहे हैं । गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि ऐसे महान गुरुओं के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची गुरु दक्षिणा होगी।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का त्याग, संघर्ष, जनजातीय समाज की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण से परिपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना रहेगा।उन्होने कहा कि महापुरुषों का जीवन केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के कल्याण के लिए स्वामीजी की निष्ठापूर्ण साधना तथा राष्ट्र चेतना के प्रसार का कार्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन को सदैव समृद्ध करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित यह पुस्तक भविष्य में स्कूलों और कॉलेजों के पुस्तकालयों की शोभा बढ़ाएगी तथा विद्यार्थियों को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा प्रदान करेगी।

कंधमाल के वनवासी समाज के लिए स्वामीजी थे सुरक्षा कवच और आध्यात्मिक मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक संत नहीं थे, बल्कि कंधमाल के वनवासी भाइयों और बहनों के लिए सुरक्षा कवच तथा जागृत आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। उन्होंने बताया कि चकापाड़ा और जलेशपट्टा आश्रमों के माध्यम से स्वामीजी ने वनवासी बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामीजी ने अवैध धर्मांतरण, गो-हत्या और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किया।

स्वामीजी की स्मृतियों के संरक्षण के लिए ओडिशा सरकार की पहल
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की अमूल्य स्मृतियों और विरासत को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।  उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार ने फुलबानी स्थित सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का नाम स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के नाम पर रखा है। इसके अलावा जलेशपट्टा आश्रम की विरासत के संरक्षण, 300 सीटों वाले छात्रावास के निर्माण और जल आपूर्ति जैसी आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए ₹13 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत 21 अगस्त से होगी। इस अवसर पर ओडिशा के विभिन्न गांवों और देश के विश्वविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से उनके विचारों और आदर्शों का प्रसार किया जाएगा।

2008 हत्या मामले पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 में जन्माष्टमी की रात हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार पर विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।  उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रिपोर्ट और संबंधित फाइलों का लोक सेवा भवन से गायब होना एक “सुनियोजित षड्यंत्र” है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन गायब फाइलों की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पीछे जो भी दोषी होंगे, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि : धर्मेंद्र प्रधान
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं संबलपुर सांसद श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पूज्य वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि  उनके दिखाए मार्ग और सेवा कार्यों का अनुसरण किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मूल्यों, समाजसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए स्वामीजी ने अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें आत्मसात कर ओडिशा को आगे ले जाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

धर्मांतरण को लेकर चिंतित थे हरेकृष्ण महताब
श्री प्रधान ने लगभग चार दशक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन ओडिशा के मुख्यमंत्री डॉ. हरेकृष्ण महताब कंधमाल क्षेत्र में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर अत्यंत चिंतित थे। उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी भूपेन बसु के माध्यम से संदेश भेजकर आग्रह किया था कि कोई संत तत्काल फुलबाणी (वर्तमान कंधमाल जिला) भेजा जाए। उनका मानना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

केवल जीवनी नहीं, एक युगपुरुष की साधना और संघर्ष का दस्तावेज
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि प्रकाशित पुस्तक केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक महान व्यक्तित्व की तपस्या, संघर्ष और समर्पण का अमूल्य दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तक की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसकी पूर्ति अब हुई है। श्री प्रधान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले जी द्वारा पुस्तक के मार्गदर्शन और विमोचन के लिए ओडिशावासियों की ओर से उनका आभार व्यक्त किया।

ओडिशा और सनातन समाज में अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि स्वामीजी पूरे ओडिशा और सनातन समाज में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के केंद्र रहे हैं। अपने बचपन की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामीजी केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं थे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सामाजिक विकास और जनकल्याण के कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। श्री प्रधान ने वर्ष 1986 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय वे तालचेर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष थे। जब तत्कालीन सरकार द्वारा स्वामीजी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा था, तब आरएसएस के सह-प्रांत प्रचारक श्याम जी गुप्ता से सूचना मिलने के बाद वे अपने साथियों के साथ रात में पानीओरा आश्रम पहुंचे और पहली बार स्वामीजी से मिले।

स्वामीजी का बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के बलिदान को याद करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि जन्माष्टमी की रात हुई उनकी निर्मम हत्या की घटना आज भी लोगों को झकझोर देती है। उन्होंने कहा कि स्वामीजी स्वयं एक दीपक की तरह जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते रहे। उनके द्वारा दिखाए गए मूल्यों, सेवा कार्यों और सत्य के मार्ग को अपनाना तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।

स्वामीजी के आदर्शों पर आधारित भविष्य निर्माण का आह्वान
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के अवसर पर श्री प्रधान ने संतों, आध्यात्मिक नेताओं और समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वर्ष 2026 से 2036 और 2047 तक ओडिशा तथा भारत को स्वामीजी के आदर्शों और प्रेरणा के आधार पर आगे बढ़ाने का संकल्प लें। उन्होंने ओडिशा के युवाओं से आत्मसम्मान जागृत करने, कोणार्क जैसे महान निर्माण कार्यों को साकार करने का साहस विकसित करने और महाप्रभु जगन्नाथ के आदर्शों से प्रेरित होकर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ विश्व को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन स्वामी लक्ष्मणानंद स्मृति न्यास के न्यासी श्री मनसुखलाल सेठिया ने किया। इस अवसर पर स्वामीजी के जीवन और साधना को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने वाले सह-लेखक श्री बिपिन बिहारी नंद और श्री बांच्छानिधि पंडा भी उपस्थित थे।

Topics: Chief Minister Mohan Charan Majhiमुख्यमंत्री मोहन चरण माझीस्वामी लक्ष्मणानंद पुस्तक विमोचनआरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबालेस्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांडSwami Lakshmanananda book releaseधर्मेंद्र प्रधानRSS government Dattatreya HosabaleDharmendra PradhanSwami Lakshmanananda murder caseOdishaओडिशा
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