
खाड़ी संकट के बीच ईरान में उसके सुरक्षा बलों ने विरोधियों को बड़े पैमाने पर कुचला है। इसी क्रम में देशभर के प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 36,500 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
ईरान इंटरनेशनल के एडिटोरियल बोर्ड ने नई क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स, फील्ड रिपोर्ट्स, डॉक्टर्स, नर्सों, गवाहों और परिवारों के बयानों की जांच के बाद पुष्टि की है कि 8-9 जनवरी को देशभर के प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 36,500 से ज्यादा लोग मारे गए। यह दो दिनों में इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन-संबंधी नरसंहार बताया जा रहा है। पहले 13 जनवरी को रिपोर्ट में कम से कम 12,000 मौतों का जिक्र था, जो IRGC इंटेलिजेंस की रिपोर्ट पर आधारित था। अब और डिटेल्स मिलने के बाद संख्या बढ़कर 36,500 से ऊपर पहुंच गई है।
IRGC इंटेलिजेंस की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल को दी गई रिपोर्टों के मुताबिक, मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी। 21 जनवरी को संसद की कमिटी को दी गई रिपोर्ट में कम से कम 27,500 मौतें बताई गईं। इंटीरियर मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार 20 जनवरी तक 30,000 से ज्यादा हो चुकी थीं। 22 और 24 जनवरी की रिपोर्टों में संख्या 33,000 और फिर 36,500 से ऊपर बताई गई। देशभर में 400 से ज्यादा शहरों और कस्बों में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों का सामना किया। कुल 4,000 से ज्यादा जगहों पर झड़पें हुईं।
राश्त: 2,500 से ज्यादा
मशहद: कम से कम 1,800
इस्फहान, नजफाबाद और खोरासगान: 2,000 से ज्यादा
करज, शहरियार और अंदीशेह: कम से कम 3,000
केरमानशाह: 700
गोर्गान: 400
तेहरान में सटीक कुल संख्या अभी साफ नहीं है, लेकिन काहरीजक मोर्ग और अस्पतालों की तस्वीरों से हजारों मौतें हुईं, खासकर दक्षिणी इलाकों में।
कई डॉक्टर्स और नर्सों ने बताया कि सुरक्षा बल अस्पतालों में घुसे और इलाज करा रहे घायलों को ले गए। कुछ तस्वीरों और वीडियो में दिखता है कि सिर में गोली लगी लाशों पर अस्पताल में भर्ती होने के निशान थे — जैसे मॉनिटरिंग इलेक्ट्रोड्स और ट्यूब्स। एक केस में पश्चिमी तेहरान में घायल युवक को एंबुलेंस में ले जाया जा रहा था, तभी एक सुरक्षा अधिकारी ने अंदर घुसकर उसके सिर में दो गोलियां मार दीं। वह पहले से बुरी तरह पीटा गया था और अर्ध-बेहोश था। कुछ लोगों को घर से उठाया गया और बाद में परिवार को काहरीजक से लाश लेने को कहा गया। कुछ मामलों में घर के दरवाजे पर बुलाकर गोली मार दी गई।
ईरान इंटेलिजेंस रिपोर्टों में भी सटीक संख्या अभी तय नहीं है क्योंकि लाशों का रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और दफन में दबाव और गड़बड़ी बताई जा रही है। स्वतंत्र जांच अभी मुश्किल है, लेकिन अस्पताल और गवाहों के आधार पर ये आंकड़े सामने आए हैं।