
इन्फ्लुएंसर्स आज सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट की दुनिया में निर्णायक शक्ति बन चुके हैं। अपनी लोकप्रियता, खास अंदाज या विशेषज्ञता के बल पर वे आम आदमी की सोच, राय और यहां तक कि राजनीतिक विचारधारा को भी प्रभावित करते हैं। किसी भी नैरेटिव को गढ़ने में उनकी भूमिका अपरिहार्य हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी इस बात को अच्छी तरह समझती है। इसलिए उसने जेन जी को अपने आंदोलन से जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में इन्फ्लुएंसर्स को जोड़ा। आरोप लग रहे हैं कि इन इन्फ्लुएंसर्स को आंदोलन से जोड़ने के लिए मोटी रकम दी गई या देने का वादा किया गया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार बहुत जरूरी है, लेकिन सियासी दलों को इससे दूर रखना चाहिए।
पत्रकार पर दबाव रहता है कि वह दोनों पक्षों की बात सुने और रिपोर्ट करे। इन्फ्लुएंसर्स पर ऐसा कोई दबाव नहीं होता। वे एक पक्षीय गीत पूरे दिन गा सकते हैं। रवीश कुमार या अजीत अंजुम की तरह। पब्लिक इंडिया टीवी, रिपब्लिक या एनडीटीवी से सवाल करती है क्योंकि ये चैनल अपने दर्शकों के प्रति जवाबदेह हैं। इन्फ्लुएंसर्स पर यह जवाबदेही नहीं होती।
परिणाम यह हुआ कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आईं। शेफाली निगम, ज्योति मिश्रा, कंचन अरोड़ा, देव कोटक, वरुण भसीन और विद्यानाथ झा सहित कई मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और पत्थरबाजी जैसी निंदनीय घटनाएं हुईं। ग्राउंड जीरो से निष्पक्ष रिपोर्टिंग दिखनी चाहिए। खबरें ‘अपने इन्फ्लुएंसर्स’ के माध्यम से प्रसारित क्यों की गईं। आरोप है कि इन इन्फ्लुएंसर्स पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। इसीलिए सोशल मीडिया पर इसकी खबर इतनी बढ़ा-चढ़ाकर चलाई जा रही है। स्क्रॉल करते जाइए, कॉकरोच की खबर खत्म होने का नाम नहीं लेती।
यह रणनीति जानबूझकर अपनाई गई लगती है। पारंपरिक मीडिया को कमजोर करके और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को मजबूत करके नैरेटिव कंट्रोल करने की कोशिश दिखती है। जेन जी तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका इन्फ्लुएंसर्स ही हैं, शायद इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी गई।
ऐसे कई यूट्यूबर हैं जो समर्पित कार्यकर्ता भाव से आंदोलन के वीडियो बना रहे हैं। कुछ चालाक क्रिएटर भी हैं जो पचास में एक वीडियो हल्की आलोचना के साथ डाल देते हैं। सवाल उठने पर वे अपनी आलोचना वाली वीडियो का लिंक झट से शेयर कर देते हैं। आलोचना वाली वीडियो को वे खुद प्रमोट नहीं करते। यह तरीका नैतिकता के सवाल खड़े करता है।
ध्रुव राठी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम, साक्षी जोशी, अभिसार शर्मा जैसे यूट्यूबर पुराने आम आदमी पार्टी वाले माने जाते हैं। कॉकरोच आंदोलन इतना आम आदमी पार्टी के करीब है कि इस आंदोलन का प्रवक्ता बनने के लिए आशुतोष रांका ने राजस्थान आप के प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने की जरूरत भी नहीं समझी। वर्तमान में वे कॉकरोच में आप के प्रवक्ता हैं। जब संजय सिंह को राहुल गांधी की आलोचना करने पर कॉकरोच पार्टी के आधिकारिक हैंडल से बताया गया कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी का पूरा समर्थन आंदोलन को है, तो संजय सिंह बहुत नाराज हुए थे।
बताया जा रहा है कि इस आंदोलन पर होने वाले खर्च की चिंता आम आदमी पार्टी के ही ऊपर है। इसलिए अचानक आशुतोष, जो पूरे आंदोलन में पिछली सीट पर बैठे हुए थे, ड्राइविंग सीट पर लाकर बिठा दिए गए। इस आंदोलन को खड़ा करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाला मुस्लिम युवक एक महीने से हजारों लोगों को बिरयानी खिला रहा था। उसके पास इस प्रश्न का संतोषजनक जवाब तक नहीं है कि इतना अंधा पैसा कहां से आ रहा है।
हाल ही में अभिनेत्री आकांक्षा पुरी ने एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने और रैलियों में जाने के लिए एक्टर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को मोटी रकम ऑफर की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि उन्हें भी इसके लिए अप्रोच किया गया था, लेकिन वह इसे केवल एक ‘मार्केटिंग कैंपेन’ या राजनीति का जरिया नहीं बनाना चाहतीं और इस गंदगी से दूर रहना पसंद करती हैं।
आकांक्षा पुरी प्रसिद्ध अभिनेत्री और मॉडल हैं। वे मुख्य रूप से हिंदी टीवी धारावाहिकों, रियलिटी शोज और दक्षिण भारतीय फिल्मों में जानी जाती हैं। उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता सोनी टीवी के पौराणिक धारावाहिक विघ्नहर्ता गणेश में देवी पार्वती की भूमिका से मिली। वे सिंगर मीका सिंह के स्वयंवर शो ‘मीका दी वोहती’ (2022) की विजेता रही हैं। बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 (2023) में भी उन्होंने हिस्सा लिया था।
अब प्रोटेस्ट में दिखाई दिए ‘सेलिब्रिटी’ नामों पर सवाल उठने लगे हैं। क्या उन्हें कोई आर्थिक लाभ दिखा इसलिए वे यहां आए? इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में पैसे लेकर पोस्ट लिखना या प्रमोशन करना अब आम बात हो गई है। कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पिछले दिनों सीजेपी प्रोटेस्ट में दिखाई दिए जिनका कंटेंट सामाजिक मुद्दों पर नहीं था। कई सजेस्टिव मीडिया प्रतिनिधि यहां सक्रिय हैं। उन्होंने भी प्रोटेस्ट जॉइन किया। सोशल मीडिया मार्केटिंग के विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मॉडल/इन्फ्लुएंसर्स का बिना किसी कमर्शियल इंटरेस्ट के इस प्रोटेस्ट से जुड़ने की बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
मॉडल और इन्फ्लुएंसर रिया इकोसिया की पुलिस वैन को रोकने वाली तस्वीर वायरल हुई। इस तस्वीर के लिए मुंबई पुलिस को धन्यवाद देना चाहिए जिसने फुर्ती से ब्रेक लगा दिया।
यह आंदोलन जेन जी का बताया जाता है। इसलिए जेन जी को जोड़ने के लिए शिक्षा पर गंभीर विमर्श करने वाले प्रबुद्धजनों को छोड़कर हर तरह का आइटम इकट्ठा किया गया है। प्रोटेस्ट स्थल पर एंटरटेनमेंट की कोई कमी न रहे। गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जगह सेलेब्रिटी और इन्फ्लुएंसर्स की उपस्थिति को प्राथमिकता दी गई।
समग्र रूप से देखें तो गोदी मीडिया के विरोधियों का यह आंदोलन स्वयं गोदी इन्फ्लुएंसर्स के भरोसे चल रहा लगता है। पत्रकारों पर हमले, एकपक्षीय रिपोर्टिंग, राजनीतिक दलों से कथित संबंध, धन के अस्पष्ट स्रोत और सेलेब्रिटीज को आर्थिक ऑफर-ये सब तथ्य मिलकर एक तस्वीर बनाते हैं। जहां नैरेटिव कंट्रोल के लिए इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल हो रहा है, वहां निष्पक्षता और स्वस्फूर्तता के दावे कमजोर पड़ जाते हैं। जेन जी को जोड़ने का उद्देश्य सही हो सकता है, लेकिन तरीके पर सवाल उठना स्वाभाविक है। समाज को इन आरोपों की जांच करनी चाहिए और सत्य तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए।