
पश्चिम बंगाल विधानसभा में महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस के पैतृक आवास में सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने का मुद्दा गूंजा। राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पूर्व बर्द्धमान जिले के पूर्वस्थली उत्तर से भाजपा विधायक गोपाल चटर्जी ने गुरुवार (23 जुलाई) को विधानसभा में पर्यटन विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार ने देश के महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस के पैतृक आवास परिसर में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कर ऐतिहासिक धरोहर का अपमान किया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। गोपाल चटर्जी ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और शौचालय को 15 अगस्त से पहले बुलडोजर से ध्वस्त करने की मांग की। पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने मीडियाकर्मियों को बताया कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है और तत्काल विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। किसी की लापरवाही या भूमिका सामने आती है, तो उसे नहीं बख्शा जाएगा।
रासबिहारी बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। वर्ष 1924 में जापान में वीर सावरकर के सहयोग से रास बिहारी बोस और सुभाष चंद्र बोस की मुलाकात हुई। इसके बाद उन्होंने विदेश में रहकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। वर्ष 1942 में रास बिहारी बोस ने जापान में भारतीय स्वतंत्रता लीग की स्थापना की, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ विदेशों में रह रहे भारतीयों को संगठित और प्रेरित करना था।