रांची (झारखंड)। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ), रांची के शैक्षणिक भवन-4 स्थित मुख्य सभागार में श्रीहरि वनवासी विकास समिति (संबद्ध: वनवासी कल्याण केन्द्र, झारखण्ड) द्वारा गरिमामयी “मेधावी छात्र अभिनंदन समारोह” का सफल आयोजन किया गया. इस विशेष समारोह में झारखंड के विभिन्न दूर-दराज जिलों से आए प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों और असाधारण प्रदर्शन के लिए मंच से सम्मानित व प्रोत्साहित किया गया.
“शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिष्ठा है” : सत्येंद्र सिंह
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सत्येंद्र सिंह ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए शिक्षा के वास्तविक दर्शन और भारतीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल आजीविका या डिग्री हासिल करने के सीमित दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए.
“शिक्षा का वास्तविक और परम उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना भर नहीं है, बल्कि एक चरित्रवान, संस्कारित, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक का निर्माण करना है। जब युवा संस्कारवान होकर शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो वे समाज और देश की उन्नति में अपना सर्वोच्च योगदान देते हैं।” – सत्येंद्र सिंह, मुख्य वक्ता
इसरो (ISRO) से लेकर विदेशों तक परचम लहरा रहे पूर्व विद्यार्थी
अपने संबोधन में मुख्य वक्ता ने संस्था के गौरवशाली अतीत और इसकी सफलताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वनवासी कल्याण केंद्र के मार्गदर्शन में पढ़े अनेक पूर्व विद्यार्थी आज देश और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं.
विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपलब्धियां:
- वैज्ञानिक अनुसंधान: संस्था से निकले कई छात्र आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जैसे शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं.
- पूर्वोत्तर भारत का विकास: अनेक पूर्व विद्यार्थी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (North-East India) के सुदूर क्षेत्रों में विकास और सामाजिक जागरण के कार्यों में तत्परता से जुटे हैं.
- अंतरराष्ट्रीय पहचान: संस्था के पूर्व छात्र विदेशों में भी अपनी प्रतिभा, योग्यता और संस्कारों के बल पर भारत का नाम वैश्विक पटल पर रोशन कर रहे हैं.

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों और शिक्षाविदों ने सम्मानित होने वाले सभी मेधावी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें जीवन में हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.













