कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को उत्तराखंड आ रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके पहले ही सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया। उन्होंने राज्य को पेपर लीक का केंद्र करार दे दिया। उनके इस बयान पर भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने तथ्यों के साथ पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार ही घोटालों के लिए जिम्मेदार है।
मालवीय ने राहुल गांधी को टैग करते हुए लिखा, उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का “epicentre” किसने बनाया था? इतिहास गवाह है कि इसकी जड़ें कांग्रेस के शासनकाल में हैं।”
एन.डी. तिवारी सरकार (2002–2007) के दौरान:
* दरोगा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। मामला इतना गंभीर था कि जांच CBI तक पहुंची।
* पटवारी भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे। एक ही परिवार के कई सदस्यों के चयन और लेन-देन के आरोपों के बाद भर्ती निरस्त करनी पड़ी।
हरीश रावत सरकार (2014–2017) के दौरान:
* 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा विवादों में रही। बाद की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।
* सिडकुल भर्ती विवाद में पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। SIT जांच तक करनी पड़ी।
* UBTER और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रहीं।
यानी जिस दौर में कांग्रेस सत्ता में थी, उस समय भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठे, जांच एजेंसियां लगीं, भर्तियां रद्द हुईं और युवाओं का विश्वास टूटता गया।
देहरादून आने से पहले उत्तराखंड की जनता और युवाओं को पूरा सच भी बता दीजिए।
उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का “epicentre” किसने बनाया था? इतिहास गवाह है कि इसकी जड़ें कांग्रेस के शासनकाल में हैं।
एन.डी. तिवारी सरकार (2002–2007) के दौरान:
• दरोगा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप… https://t.co/HNIoSAcrLY— Amit Malviya (@amitmalviya) July 16, 2026
अब वर्तमान की भी बात कर लेते हैं।
जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में UKSSSC भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तो क्या उसे दबाया गया? नहीं।
* देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून बनाया गया।
* 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
* भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए।
* पिछले चार वर्षों में 34,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से मिली हैं।
यही फर्क है।
कांग्रेस के दौर में घोटाले होते थे, कार्रवाई नहीं होती थी। भाजपा सरकार में गड़बड़ी सामने आई तो कानून बना, माफिया जेल गए, जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं और व्यवस्था बदली गई। मालवीय ने राहुल गांधी से सवाल किया, युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने से पहले यह भी बताइए कि जिन भर्ती घोटालों की नींव कांग्रेस के शासनकाल में पड़ी, उनके लिए जवाबदेह कौन था?
उत्तराखंड भाषण नहीं रिकॉर्ड देखता है
मालवीय ने कहा कि उत्तराखंड का युवा सब याद रखता है। उसे भाषण नहीं, रिकॉर्ड दिखाई देता है। एक तरफ भर्ती घोटालों का इतिहास है, दूसरी तरफ कठोर कानून, माफियाओं पर कार्रवाई, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और हजारों युवाओं को योग्यता के आधार पर मिली सरकारी नौकरियां। युवाओं के सपनों की सबसे बड़ी दुश्मन वह राजनीति है जिसने वर्षों तक व्यवस्था को सड़ने दिया। और युवाओं का सबसे बड़ा साथी वह शासन है जिसने व्यवस्था को साफ किया, कानून को सख्ती से लागू किया और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल किया।

















