
प्रतीकात्मक तस्वीर
वैश्विक संकटों के बावजूद विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में भरोसा बढ़ने लगा है। इसका असर भी दिख रहा है। विदेशी निवेशकों ने जून में भारतीय डेट में दिलचस्पी दिखानी शुरू की थी, अब जुलाई में उन्होंने इक्विटी की तरफ भी रुख कर लिया है। कई महीनों की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जुलाई में नेट खरीदार बन गए हैं। महीने के पहले 10 दिनों में उन्होंने 2.59 बिलियन डॉलर (करीब 24,662 करोड़ रुपये) लगाए हैं।
रुपये की स्थिरता और सेमीकंडक्टर से निवेश का रुख बदलने जैसी वजहों से यह बदलाव आया है। इससे पहले इस साल शुरुआती महीनों में वैल्यूएशन, ग्लोबल अनिश्चितता और कैपिटल फ्लो के शिफ्ट की वजह से विदेशी निवेशक लगातार पैसे निकाल रहे थे।
जून में सरकार और RBI ने सॉवरेन बॉन्ड्स तक पहुंच आसान की और कुछ टैक्स संबंधी दिक्कतें दूर कीं, जिससे ज्यादातर पैसा डेट में आया। लेकिन जुलाई में इक्विटी भी वापस पसंद की जाने लगी। कुल इनफ्लो में से 1.6 बिलियन डॉलर (61% से ज्यादा) इक्विटी में गया। इसके बाद फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) से 697 मिलियन डॉलर और जनरल लिमिट के तहत डेट में 340 मिलियन डॉलर आया।
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मार्च से मई के बीच FPIs ने भारतीय बाजार से 24 बिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा निकाला था। मार्च में तो रिकॉर्ड 13.6 बिलियन डॉलर की निकासी हुई। जून में थोड़ी राहत मिली जब 531 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो हुआ। जुलाई में यह ट्रेंड और मजबूत हुआ। 1 जुलाई से 10 जुलाई तक हर ट्रेडिंग सेशन में पॉजिटिव नेट इनफ्लो रहा। 9 जुलाई को एक दिन में ही करीब 978 मिलियन डॉलर आया।
विदेशी निवेशकों ने जून तक लगातार चार महीने भारतीय शेयर बेचे थे। जून में अकेले 5.1 बिलियन डॉलर से ज्यादा निकाला गया। लेकिन जुलाई में इक्विटी सबसे बड़ा आकर्षण बन गई। पहले 10 दिनों में यहां 15,157 करोड़ रुपये (करीब 1.6 बिलियन डॉलर) आए। डेट में भी निवेश जारी है, हालांकि प्राथमिकताएं थोड़ी बदली हैं। FAR और जनरल डेट रूट से इनफ्लो अच्छा रहा, जो जून के बॉन्ड खरीदारी के जोर को आगे बढ़ा रहा है।
मैक्वेरी के एनालिस्ट सुरेश गणपति के अनुसार, इनफ्लो का बड़ा हिस्सा फाइनेंशियल सर्विसेज में आ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरिया और ताइवान में ज्यादा वोलेटिलिटी है, इसलिए भारत में फाइनेंशियल्स में इनफ्लो की अगुवाई होने की उम्मीद है।