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Explainer: E20 पेट्रोल पर विवाद क्यों, क्या है ये और क्यों इस पर जोर दे रही है सरकार?

भारत में E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग से 1.84 लाख करोड़ रुपये की बचत, किसानों को 1.58 लाख करोड़ extra आय और 909 मिलियन टन CO2 उत्सर्जन में कमी। 2025-26 में 1200 करोड़ लीटर इथेनॉल का लक्ष्य। जानिए फायदे, चिंताएं और सरकार का जवाब।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 12, 2026, 01:01 pm IST
in भारत
e20 ethanol blending petroleum ministry busts 10 social media

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के मुद्दे पर विवाद लगातार जारी है। एक तरफ सरकार E 20 पेट्रोल के कारण गाड़ियों में हो रही खराबियों को मनगढ़ंत करार दे रही है। दूसरी तरफ लगातार लोग सोशल मीडिया के जरिए इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के खराब होने का वीडियो शेयर कर रहे हैं। लेकिन, इसे समझने की आवश्यकता है कि आखिर E20 है क्या, यह विवाद क्यों उठा और इसमें कौन क्या कह रहा है।

E20 आखिर है क्या?

E20 का मतलब है 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण। साधारण पेट्रोल में 100% पेट्रोल होता है, लेकिन E20 में इथेनॉल की 20% मात्रा मिलाई जाती है। इथेनॉल एक पारदर्शी, बिना रंग का तरल है जो मुख्य रूप से गन्ने और मक्के से बनाया जाता है। सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्य रखती है ताकि आयात कम हो, प्रदूषण घटे और किसानों को फायदा हो।

विवाद क्यों शुरू हुआ?

दावा किया जा रहा है कि E20 से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और पुरानी गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें शेयर कर रहे हैं। विपक्ष ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि बिना बताए लोगों पर प्रयोग किया जा रहा है। तहसीन पूनावाला जैसे एक्टिविस्टों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना कि माइलेज पर असर पड़ सकता है, लेकिन यह ट्रैफिक और ड्राइविंग स्टाइल पर भी निर्भर करता है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे मनगढ़ंत विवाद बताया। उन्होंने कहा कि E20 की बिक्री पहले से ही चल रही थी, शिकायतें E85 फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लॉन्च के बाद बढ़ीं।

इसे भी पढ़ें: विकास के साथ विरासत का भी संरक्षण कर रही मोदी सरकार, जानिए कैसे ?

इथेनॉल ब्लेंडिंग का इतिहास

भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग 2005 में शुरू हुई थी। 2013-14 में यह सिर्फ 1.5% पर था। 2030 तक 20% का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2025 की शुरुआत में ही E20 पूरा हो गया। 2001-04 में प्रयोग शुरू हुआ, 2006 में कुछ राज्यों में E5 लागू हुआ। 2018 में जैव ईंधन नीति आई, GST कम किया गया और सप्लाई बढ़ाने के लिए प्लांट लगाए गए। सरकार कहती है कि यह कोई अचानक फैसला नहीं था। ऑटो कंपनियों, ARAI और SIAM जैसी एजेंसियों से सलाह ली गई। ब्राजील और अमेरिका जैसे देश दशकों से इथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं।

सरकार के अनुसार फायदे

ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल का आयात कम होता है।
विदेशी मुद्रा बचत: 2014-15 से अब तक करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये की बचत।
किसानों को फायदा: गन्ना और मक्का किसानों को 1.58 लाख करोड़ रुपये extra आय।
पर्यावरण: 909 मिलियन टन CO2 उत्सर्जन कम हुआ।
2013-14 में 38 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदा जाता था, अब 2025-26 में 1200 करोड़ लीटर पहुंच गया।

चिंताएं और सरकार का जवाब

माइलेज और इंजन नुकसान: सरकार कहती है कि बड़े पैमाने पर असामान्य समस्या नहीं आई। मारुति, हीरो जैसी कंपनियों के सर्विस डेटा में बड़ी शिकायत नहीं। पुरानी गाड़ियों के मैनुअल में E10 लिखा था, लेकिन इसका मतलब E20 के लिए पूरी तरह असुरक्षित नहीं है। फिर भी, निर्माता की सलाह मानने की बात कही गई है।

सस्ता क्यों नहीं?

इथेनॉल की लागत तय कीमत पर किसानों से खरीदने के कारण हमेशा कम नहीं होती। मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि आयात घटाना है। वहीं अलग-अलग ईंधन की उपलब्धता को लेकर तर्क दिया जा रहा है कि इससे सप्लाई चेन महंगी और जटिल हो जाती। बड़े निवेश हो चुके हैं, इसलिए पीछे हटना मुश्किल।

Topics: इथेनॉल ब्लेंडिंग भारतE20 पेट्रोलE20 माइलेज नुकसानE20 इथेनॉल ब्लेंडिंग
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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