नई दिल्ली। प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े मामले में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने पीएफआई के चेयरमैन ओ.एम.ए. सलाम, वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर सहित 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने मामले में 29 जुलाई से ट्रायल शुरू करने के निर्देश दिया है।
कोर्ट ने सभी आरोपियों के आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन एकत्र करने, आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने इत्यादि आरोपों के तहत आरोप तय किए हैं।
भारत में इस्लामिक साशन लाने की साजिश
पीएफआई की देश के खिलाफ युद्ध छेड़कर, भारत की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़कर वर्ष 2047 तक इस्लामिक शरिया शासन लागू करने की साजिश थी। वर्ष 2022 में एनआईए ने इस संबंध में मामल दर्ज किया था। भारत सरकार ने सितंबर 2022 में पीएफआई और उससे जुड़े कई संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया था।
इन पर आरोप हुए तय
ओएम अब्दुल सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपीएन एलामाराम, ई अबुबकर, प्रोफेसर पी कोया, एम मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, एएस इस्माइल, मो. युनूस, मोहम्मद बशीर, शफीर केपी, जसीर केपी, शाहिद नासीर, वसीम अहमद, मो. शाकिफ, मो. फारुख रहमान और यासिर हसन।
पीएफआई से जुड़े ये संगठन भी बैन
पीएफआई के सहयोगी संगठनों रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राईट्स आर्गनाइजेशन, नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन केरल को बैन किया गया है।













