
खाड़ी संकट एक बार फिर से गहरा गया है। अमेरिका ने ईऱान पर हमले शुरू कर दिए हैं। इस बीच अब इस्लामिक मुल्क ने बड़ा कदम उठाते हुए गुपचुप तरीके से अपनी परमाणु क्षमताओं को फिर से विकसित करना शुरू कर दिया है। इस बात का खुलासा नई सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है। पता चला है कि ईरान अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद अपनी कुछ परमाणु और सैन्य सुविधाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इन दिनों मध्य पूर्व में तनाव का माहौल है। अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद होर्मुज की खाड़ी में भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जून 2025 में हुए इन हमलों के कुछ हफ्तों बाद ईरान ने अपनी क्षतिग्रस्त सुविधाओं पर काम शुरू किया।
सैटेलाइट इमेज के अनुसार, पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में सबसे अधिक गतिविधि दिख रही है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इस जगह को परमाणु हथियार विकास से जुड़े उच्च विस्फोटक अनुसंधान से जोड़ती रही हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि हमलों में बने गड्ढों (क्रेटर) को भरने का काम चल रहा है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत हो रही है। अंडरग्राउंड सुविधाओं में वाहनों की आवाजाही भी बढ़ गई है।
पारचिन के अलावा कुछ मिसाइल बेस पर भी काम शुरू हो गया है। खासतौर पर तबरीज और केरमानशाह के पास वाले बेस प्रभावित हुए थे। साथ ही कुछ एयरबेस पर भी मरम्मत का काम दिख रहा है।
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इस्फान, फोर्डो और नतांज जैसे मुख्य परमाणु सुविधाओं में बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण के सबूत अभी नहीं मिले हैं। इन जगहों पर गतिविधि अपेक्षाकृत कम है।
जून 2025 के अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जून के आखिर में अमेरिका के साथ एक समझौता (MOU) किया था। इसमें ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फ्रीज रखने और परमाणु हथियार न बनाने की बात कही थी। लेकिन हाल ही में ट्रंप प्रशासन के ईरान पर नए हमलों के आदेश के बाद यह समझौता कमजोर पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारचिन जैसी साइट पर अगर परमाणु से जुड़े काम हो रहे हैं तो यह समझौते का उल्लंघन माना जा सकता है।