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खाड़ी में तनाव के बीच राहत: दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, 7 जहाज अभी इंतजार में

दो भारतीय जहाज लीला वाडिनार और महा रूस ने कुवैत क्रूड तेल लेकर हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर लिया। खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच 7 भारतीय जहाज अभी भी निकासी का इंतजार कर रहे हैं। 149 नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

Published by
कुलदीप सिंह

खाड़ी में अशांति दोबारा से लौट आई है। लेकिन इसी बीच भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है कि दो भारतीय जहाजों ने सुरक्षित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर लिया है। हालंकि, भारतीय तिरंगे वाले 7 जहाज अभी भी वहां होर्मुज पार करने के इंतजार में हैं।

लीला वाडिनार ने कुवैत का क्रूड तेल लेकर स्ट्रेट पार किया

भारतीय जहाज़ लीला वाडिनार ने 2.7 लाख टन कुवैत के क्रूड तेल की लोडिंग के साथ होर्मुज स्ट्रेट को पार किया। यह क्रॉसिंग बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात को हुई। इससे पहले ईरान की सेपाह नेवी ने ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के सिरे पर इसे वापस मुड़ने को कहा था। लेकिन अब यह जहाज़ सुरक्षित निकल गया है।

दूसरा जहाज़ भी पार किया

दूसरा भारतीय जहाज़ महा रूस भी होर्मुज स्ट्रेट से गुजर गया है। दोनों जहाज़ों की सफल निकासी से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन इलाके में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

सात जहाज़ अभी इंतजार में

गुरुवार शाम तक सात भारत-बाउंड जहाज़ (कुछ भारतीय ध्वज वाले और कुछ विदेशी) अभी भी निकासी का इंतजार कर रहे थे। इनमें कुल 149 नाविक सवार हैं। इनमें छह फर्टिलाइजर बल्क कैरियर शामिल हैं। इनमें से एक जहाज़ पर करीब 45,000 टन यूरिया लोड हो चुका है, बाकी जहाज़ लोडिंग के चरण में हैं। भारत को उम्मीद थी कि अगले कुछ दिनों में इन जहाज़ों को पर्सियन गल्फ से निकाला जा सकेगा।

संघर्ष बढ़ने से आवाजाही फिर रुकी

लेकिन तनाव बढ़ने के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही एक बार फिर सीमित हो गई है। इस वजह से निकासी में देरी हो सकती है। सरकार इस स्थिति को देखते हुए नए एडवाइजरी जारी कर सकती है। इनमें नाविकों को सतर्क रहने की सलाह और वेस्ट एशिया के लिए जहाज़ किराए पर लेने से बचने की अपील हो सकती है।

पांच और भारतीय जहाज़ इलाके में

अधिकारियों के मुताबिक, पर्सियन गल्फ में पांच और भारत-ध्वज वाले जहाज़ मौजूद हैं। इनमें दो बल्क कैरियर, एक क्रूड ऑयल टैंकर, एक ऑयल/केमिकल टैंकर और एक खाली ड्रेजर शामिल हैं। ये जहाज़ अभी तुरंत बाहर निकलने वाले नहीं थे, इसलिए उनकी स्थिति अलग है।

 

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