ABVP: छात्रशक्ति से राष्ट्रशक्ति में परिणीति के 78 वर्ष, वैचारिक स्पष्टता-संगठनात्मक अनुशासन है सबसे बड़ी शक्ति
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ABVP: छात्रशक्ति से राष्ट्रशक्ति में परिणीति के 78 वर्ष, वैचारिक स्पष्टता-संगठनात्मक अनुशासन है सबसे बड़ी शक्ति

आज जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपनी 78 वर्षों की गौरवगाथा का उत्सव मना रही है, तब यह केवल एक संगठन की स्थापना की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारत के विद्यार्थी आंदोलन की उस स्वर्णिम यात्रा का उत्सव है जिसने अनगिनत युवाओं को राष्ट्र सेवा का मार्ग दिखाया।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Lalit Fulara
Jul 9, 2026, 04:03 pm IST
inमत अभिमत

भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा को केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं अपितु चरित्र निर्माण, समाजोत्थान व राष्ट्र चेतना का आधार माना गया है। हमारे ग्रंथों में वर्णित है-विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात धर्मम् ततः सुखम्।। इसी महान शिक्षा दृष्टि को आधुनिक भारत के विद्यार्थी जीवन में मूर्त रूप देने का कार्य अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किया-“देह तो थी, ध्येय परिषद ने दिया।” यह केवल एक पंक्ति नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं की अनुभूति है जिन्होंने अपने छात्र जीवन को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखा बल्कि राष्ट्र पुनर्निर्माण का संकल्प लेकर स्वयं को समाज के लिए समर्पित किया। 9 जुलाई भारतीय छात्र आंदोलन के इतिहास में केवल एक तिथि भर नहीं अपितु एक ऐसे विचार की आरम्भ तिथि है जिसने विद्यार्थी जीवन को राष्ट्र जीवन के व्यापक संदर्भ से जोड़ने का अद्वितीय कार्य किया। इसी दिन 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का विधिवत पंजीकरण हुआ और तब से लेकर आज तक परिषद निरंतर छात्रहित, समाजहित एवं राष्ट्रहित के त्रिवेणी संगम का प्रतीक बनी हुई है।

आज जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपनी 78 वर्षों की गौरवगाथा का उत्सव मना रही है, तब यह केवल एक संगठन की स्थापना की वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारत के विद्यार्थी आंदोलन की उस स्वर्णिम यात्रा का उत्सव है जिसने अनगिनत युवाओं को राष्ट्र सेवा का मार्ग दिखाया। विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन के रूप में स्थापित परिषद ने समय-समय पर यह सिद्ध किया है कि विद्यार्थी भविष्य का नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान का राष्ट्र निर्माता है। भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद राष्ट्र अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था। शिक्षा व्यवस्था औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त थी, समाज दिशाहीनता का अनुभव कर रहा था और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने वाला कोई व्यापक राष्ट्रीय मंच उपलब्ध नहीं था। ऐसे समय कुछ राष्ट्रनिष्ठ युवाओं ने यह अनुभव किया कि यदि भारत का भविष्य उज्ज्वल बनाना है तो विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण का सहभागी बनाना होगा। इसी चिंतन से परिषद का उदय हुआ। परिषद का ध्येय वाक्य “ज्ञान, शील, एकता” विद्यार्थियों की पहचान तथा उनकी अंतर्निहित सम्भावना का दूरदर्शी तत्व है। उस दौर में विद्यार्थियों के प्रति सकारात्मक मानसिकता की स्थापना करते हुए परिषद ने नारा दिया “छात्र शक्ति-राष्ट्र शक्ति”; अतः राष्ट्र पुनर्निर्माण के कार्य का प्राथमिक आधार विद्यार्थी शक्ति का एकसूत्र होना है।

इस यात्रा में परिषद की विशेषता यह भी रही कि उसने रचनात्मक आंदोलन के साथ देशकाल-परिस्थितियों के अनुसार राष्ट्र की विद्यार्थी शक्ति को दिशा देने के लिए वैविध्यपूर्ण गतिविधियों को अपना मूल स्वभाव बनाया। छात्र समस्याओं के समाधान से लेकर शिक्षा सुधार, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, आपदा राहत, रक्तदान, सेवा बस्तियों में कार्य, महिला स्वावलंबन, पूर्वोत्तर भारत के साथ भावनात्मक एकात्म, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अनेक विषय परिषद की कार्ययोजना का हिस्सा बने। परिषद का विश्वास रहा कि परिवर्तन विरोध या विवाद से नहीं बल्कि सकारात्मक सृजन से आता है। यही उसका रचनात्मक दृष्टिकोण है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

अभाविप की यात्रा केवल परिसरों तक सीमित नहीं रही। जब भी राष्ट्र के सामने संकट आया, परिषद के कार्यकर्ता सबसे आगे दिखाई दिए। कैंपस टू कम्युनिटी के माध्यम से परिसर में अध्ययनरत विद्यार्थियों को समाज में उनकी भूमिका का बोध कराने के लिये परिषद ने प्रभावी ढंग से कार्य किया। चाहे प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य हों, सामाजिक जागरण के अभियान हों, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास हों अथवा शिक्षा के अधिकार और गुणवत्ता के लिए संघर्ष, हर क्षेत्र में परिषद ने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से समाज का विश्वास अर्जित किया।

परिषद की एक विशेष पहचान उसके विविध आयामों व प्रकल्पों से भी बनती है। स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट (एसएफडी) के माध्यम से पर्यावरण और सतत विकास का विमर्श, स्टूडेंट्स फॉर सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों का सहयोग, राष्ट्रीय कला मंच के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं कला का संरक्षण, खेलो भारत के माध्यम से युवाओं में स्वस्थ जीवनशैली के आग्रह के साथ पारंपरिक खेलों का संरक्षण व संवर्धन, SEIL (Students’ Experience in Interstate Living) के माध्यम से पूर्वोत्तर और भारत के अन्य स्थानों के बीच आत्मीय संवाद, थिंक इंडिया के माध्यम से अखिल भारतीय महत्व के संस्थानों से नेतृत्व का निर्माण, शोध के माध्यम से भारत आधारित अनुसंधान तथा सविष्कार के माध्यम से नवोन्मेष व उद्यमिता- ये सभी आयाम परिषद के व्यापक दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करते हैं। इन 78 वर्षों में परिषद ने केवल संगठन का विस्तार नहीं किया बल्कि नेतृत्व की ऐसी परंपरा विकसित की जिसने समाज, शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, न्याय, उद्योग, मीडिया और राजनीति सहित अनेक क्षेत्रों को राष्ट्रनिष्ठ नेतृत्व प्रदान किया। परिषद की कार्यपद्धति व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर आधारित है। यहाँ कार्यकर्ता केवल कार्यक्रमों का सहभागी नहीं बनता बल्कि सेवा, अनुशासन, संगठन और नेतृत्व के संस्कार प्राप्त करता है।

परिषद की सबसे बड़ी शक्ति उसकी वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक अनुशासन है। समय बदलता रहा, परिस्थितियाँ बदलती रहीं लेकिन परिषद का मूल उद्देश्य नहीं बदला इसलिए राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियाँ और समाज परिवर्तन से राष्ट्र पुनर्निर्माण का लक्ष्य आज भी उसकी प्राथमिकता में है। यही कारण है कि लाखों विद्यार्थी हर वर्ष परिषद से जुड़कर स्वयं को एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य का भागीदार बनाते हैं। आज नई शिक्षा नीति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे समय में परिषद विद्यार्थियों को केवल रोजगार के लिए नहीं बल्कि उत्तरदायी नागरिक और सक्षम नेतृत्व के रूप में विकसित करने का कार्य कर रही है। शिक्षा को भारतीयता, नैतिकता और आधुनिकता से जोड़ने का जो प्रयास परिषद दशकों से करती रही है, वह आज और भी अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है। अभाविप की अठहत्तर वर्षों की यात्रा अटूट पुरुषार्थ, राष्ट्रभक्ति तथा छात्रशक्ति से राष्ट्रशक्ति की परिणीति की जीवंत कथा है। आज आवश्यकता है कि देश का प्रत्येक विद्यार्थी केवल सफलता का स्वप्न न देखे बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का बोध करते हुए राष्ट्र पुनर्निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी आहुति प्रदान करे।

Topics: ABVPAkhil Bharatiya Vidyarthi Parishadअखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदएबीवीपी
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