प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पहुंच गए हं। वह बुधवार को मेलबर्न में लैंड हुए। आज वह देश के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात करेंगे। यह दोनों देशों का तीसरा वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी को मेलबर्न में गर्मजोशी भरा और खास स्वागत मिला। सम्मेलन में दोनों नेता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स, शिक्षा साझेदारी और अन्य कई मुद्दों पर बात करेंगे। मोदी अल्बनीज के साथ सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे और दोनों देशों के बीच पूर्ण रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग लोगों से भी मुलाकात करेंगे।
इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री ने एक्स के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया हूं। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया पूर्ण रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देगी। प्रधानमंत्री अल्बनीज से बातचीत का इंतजार है। भारतीय डायस्पोरा से भी मिलने का मौका मिलेगा, जो हमारे साझेदारी का अहम स्तंभ है।”
12 साल बाद मेलबर्न पहुंचे पीएम मोदी
यह मोदी की ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है। वे 12 साल बाद मेलबर्न आ रहे हैं। इस यात्रा को जियोपॉलिटिकल रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इससे भारत की MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) और इंडो-पैसिफिक विजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही देश QUAD के पार्टनर हैं। अधिकारी कहते हैं कि यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक में नई संभावनाएं और समृद्धि लाएगी, खासकर छोटे द्वीप विकासशील देशों के लिए।
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प्रधानमंत्री का खास स्वागत
एक अनोखा और खास इशारा यह है कि ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन AC खुद मेलबर्न आएंगी और मोदी से मिलेंगी। आमतौर पर प्रोटोकॉल में यह नहीं होता, लेकिन इस बार ऐसा किया गया है। अधिकारी कहते हैं कि इससे दोनों देशों के रिश्तों की परिपक्वता दिखती है।
व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन
यात्रा के दौरान व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा। पीएम मोदी CEOs फोरम को संबोधित करेंगे। 2026 का भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाएगा और व्यापार-निवेश के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को लागू करने में मदद करेगा। खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन में साझेदारी पर फोकस होगा।
भारतीय डायस्पोरा से मुलाकात
मोदी एक बड़े समुदाय कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग अब करीब दस लाख हैं। यह वहां की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी डायस्पोरा कम्युनिटी है। अधिकारी कहते हैं कि यह समुदाय दोनों देशों के बीच के रिश्तों का मजबूत आधार बन गया है।
शिक्षा में बढ़ता सहयोग
ऑस्ट्रेलिया नई शिक्षा नीति के तहत भारत का अहम पार्टनर बनता जा रहा है। हाल ही में फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी मिली है। अब कुल आठ ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोल सकेंगी।











