इंदौर में खजराना इलाके में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के बारे में कथित घोटाले की फेक न्यूज फैलाई जा रही है। इसमें आरोप लगाया जा रहा है कि अस्पताल अभी बना भी नहीं है, फिर भी वहां करोड़ों रुपये की दवाएं और मशीनें खरीद ली गई हैं, साथ ही अवैध तरीके से डॉक्टरों और स्टाफ की नियुक्तियां भी हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इन खबरों का फैक्ट चेक किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की रिपोर्ट के आधार पर साफ कहा है कि ये सभी दावे भ्रामक और बिना आधार के हैं। अस्पताल के नाम पर न तो कोई दवा खरीदी गई है और न ही किसी डॉक्टर की गलत पोस्टिंग हुई है।
क्यों नहीं बनी अब तक इमारत?
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, खजराना गांव के सर्वे नंबर 435/1/1 में करीब 0.700 हेक्टेयर जमीन अस्पताल के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इस जमीन का असली कब्जा अभी तक नहीं मिला है। फिलहाल यह जमीन इंदौर नगर निगम के कब्जे में है और उसी का उपयोग हो रहा है।
इसी वजह से अस्पताल की इमारत नहीं बन पाई है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने 6 जुलाई को एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द इस जमीन से कब्जा हटवाकर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया जाए। इसके बाद ही भवन निर्माण की प्रशासकीय मंजूरी ली जा सकेगी और काम शुरू हो सकेगा।
कर्मचारियों की तैनाती का सच
2021 में शासन ने इस अस्पताल के लिए 87 पद स्वीकृत किए थे। इनमें से अभी तक केवल 29 स्टाफ नर्स, 5 फार्मासिस्ट और 1 लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना हुई है। कुल 35 कर्मचारी हैं। चूंकि अस्पताल की बिल्डिंग अभी तैयार नहीं है, इसलिए इन कर्मचारियों को शहर की अन्य चल रही सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में ड्यूटी पर लगाया गया है। वे वहां नियमित काम कर रहे हैं। संबंधित संस्थाओं के प्रभारियों ने उनके काम का प्रमाण-पत्र भी दिया है और उसी के आधार पर उन्हें सही वेतन मिल रहा है।
दवा और उपकरण खरीदी का दावा
कुछ खबरों में यह भी कहा गया था कि अस्पताल के लिए बड़े पैमाने पर दवाएं और महंगे उपकरण खरीद लिए गए हैं। प्रशासन ने इसे पूरी तरह गलत बताया है। CMHO की रिपोर्ट में साफ है कि इस प्रोजेक्ट के लिए अभी तक कोई वित्तीय बजट ही जारी नहीं हुआ है, इसलिए खरीदी का सवाल ही नहीं उठता। कलेक्टर शिवम वर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली ऐसी खबरों पर बिना जांचे भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें।
















