मेंहदीपुर बालाजी: कौन हैं यहां के तीन देव? क्या श्रद्धालु घर ला सकते हैं प्रसाद­­? जानिये मंदिर की कहानी
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मेंहदीपुर बालाजी: कौन हैं यहां के तीन देव? क्या श्रद्धालु घर ला सकते हैं प्रसाद­­? जानिये मंदिर की कहानी

भगवान श्रीराम के दूत हनुमानजी का पवित्र धाम मेंहदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के करौली और दौसा जिले की सीमा पर है। यह प्राचीन मंदिर दो पहाड़ियों के बीच है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jul 7, 2026, 11:15 am IST
inधर्म-संस्कृति

नई दिल्ली/राजस्थान: भगवान श्रीराम के दूत हनुमानजी का पवित्र धाम मेंहदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के करौली और दौसा जिले की सीमा पर है। यह प्राचीन मंदिर दो पहाड़ियों के बीच है। बालाजी मंदिर एक हजार साल से भी अधिक पुराना है और यहां हनुमान जी की स्वयंभू मूर्ति है। यह हनुमान जी का एक जागृत स्थल है जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।

मेंहदीपुर बालाजी में एक साथ हैं तीन देव
मेंहदीपुर बालाजी मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी, भैरव जी और प्रेतराज सरकार एक साथ विराजमान हैं। इन तीनों देवों की पूजा का एक निश्चित क्रम है। सबसे पहले स्वयंभू हनुमानजी की मूर्ति है और उसके बाद भैरव बाबा की एवं अंत में प्रेतराज सरकार हैं। सबसे पहले भोग या अर्जी हनुमानजी को लगती है। हनुमानजी को लगने वाले अर्जी के दो लड्डू वहीं निकालकर ग्रहण किये जाते हैं। यहां भैरव बाबा हनुमानजी के कोतवाल हैं और प्रेतराज सरकार न्यायाधीश। प्रेतराज सरकार ही प्रेत बाधाओं, बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति दिलाते हैं।

वैसे भी हनुमान जी कलयुग के अधिष्ठात्री देव हैं। मां सीता ने हनुमानजी को अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का वरदान दिया था।हनुमानजी अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं। उनका एकमुखी स्वरूप जितना सौम्य है, पंचमुखी स्वरूप उतना ही उग्र।
कलयुग में कई महान विभूतियों को हनुमानजी ने दर्शन दिये। एक थे महाकवि और राम चरण चाकर गोस्वामी तुलसीदास, दूसरे नीब करौली महाराज। इसके अलावा मेंहदीपुर बालाजी के पहले महंत गोसाईं जी महाराज को भी एक हजार से अधिक वर्ष पहले हनुमानजी ने साक्षात दर्शन दिए थे।

मंदिर में मिलने वाले हनुमानजी के प्रसाद को घर लाते हैं श्रद्धालु
मेंहदीपुर बालाजी मंदिर में अब हनुमानजी को भोग लगा हुआ प्रसाद मिलता है। श्रद्धालु बालाजी को भोग लगा प्रसाद घर ला सकते हैं। इस प्रसाद को आप बांट भी सकते हैं। मंदिर समिति श्रद्धालुओं को हनुमान जी का भोग लगा प्रसाद पैकेट बंद डिब्बों में वितरित करती है। मंदिर में मिलने वाले महाप्रसाद के पैकेट बंद डिब्बे में लिखा हुआ होता है कि यह महाप्रसाद हनुमानजी को भोग लगा हुआ है और इसे आप अपने घर ले जा सकते हैं।

मेंहदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास
मेंहदीपुर बालाजी का इतिहास सदियों पुराना है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र अरावली की पहाड़ियों में घने जंगल से घिरा हुआ था। यहां जंगली जानवरों का खौफ रहता था। मंदिर के पहले महंत गोसाईं जी महाराज को स्वप्न में हनुमानजी के दर्शन हुए थे। स्वप्न के दौरान उन्होंने प्रकाश, सैनिकों और हाथियों की एक बड़ी फौज को घाटी से गुजरते हुए देखा। उसी दिव्य आज्ञा के बाद यहां पूजा-अर्चना और मंदिर की स्थापना की गई। बाला जी महाराज की मूर्ति के चरणों में एक कुंड है, जिसका जल कभी समाप्त नही होता है। बालाजी महाराज के ह्रदय के पास के छिद्र से एक पतली सी जलधारा लगातार बहती है। उसी जल से भक्तों को छींटे लगते हैं। चोला चढ़ जाने पर भी जलधारा बंद नहीं होती है। इस पवित्र जल को श्रद्धालु अपने घरों के लिए भी लाते हैं।

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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