भुवनेश्वर: ओडिशा के औद्योगिक इतिहास में अब तक के सबसे बड़े निवेश प्रस्तावों में से एक के तहत राज्य सरकार ने गुरुवार को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रमुख निवेश कंपनी इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी समूह की प्राकृतिक संसाधन निवेश इकाई इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग के साथ 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹1.10 लाख करोड़) की लागत से एक एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह निवेश ओडिशा में प्रस्तावित अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) माना जा रहा है। साथ ही, यह भारत के मेटलर्जी क्षेत्र में सबसे बड़े विदेशी निवेशों में शामिल है। इस परियोजना से राज्य में 53,500 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है और ओडिशा वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
लोकसेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री, उच्च अधिकारी तथा अडानी समूह और आईएचसी समूह के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
यह परियोजना अडानी एंटरप्राइजेज और इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग के बीच 50:50 संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) के रूप में विकसित की जाएगी। इसके साथ ही अडानी समूह औपचारिक रूप से एल्युमिनियम उद्योग में प्रवेश करेगा।
ओडिशा के औद्योगिक विकास में नया अध्याय
राज्य सरकार के अनुसार यह परियोजना ओडिशा की औद्योगिक विकास रणनीति में मील का पत्थर साबित होगी। यह निवेश राज्य सरकार के “समृद्ध ओडिशा-2036” और केंद्र सरकार के “विकसित भारत-2047” के विजन को गति देगा।
करीब ₹1.10 लाख करोड़ के इस निवेश के माध्यम से ओडिशा में खनन से लेकर एल्युमिनियम के अंतिम उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। परियोजना के अंतर्गत बॉक्साइट खनन, एल्युमिना रिफाइनिंग, एल्युमिनियम स्मेल्टिंग, कैप्टिव पावर उत्पादन, डाउनस्ट्रीम विनिर्माण तथा आवश्यक आधारभूत संरचना का विकास किया जाएगा।
यह परियोजना दो चरणों में लागू होगी। पहले चरण में लगभग ₹66,000 करोड़ तथा दूसरे चरण में करीब ₹44,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
53,500 से अधिक रोजगार के अवसर
इस मेगा परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका व्यापक रोजगार सृजन है। राज्य सरकार के अनुसार परियोजना से 53,500 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इनमें निर्माण चरण के दौरान लगभग 35,000 रोजगार तथा परियोजना के संचालन शुरू होने के बाद करीब 18,500 स्थायी रोजगार शामिल होंगे।
इसके अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, रखरखाव, सहायक उद्योगों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के माध्यम से हजारों अतिरिक्त रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस समझौते को ओडिशा के औद्योगिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे राज्य वैश्विक एल्युमिनियम आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा के पास प्रचुर खनिज संपदा, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा है। यूएई के आईएचसी समूह के साथ यह साझेदारी राज्य के संसाधनों को वैश्विक निवेश और आधुनिक तकनीक से जोड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ओडिशा वैश्विक एल्युमिनियम आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश कर रहा है। देश में धातु एवं खनिज आधारित उद्योगों का अग्रणी केंद्र होने के बाद अब राज्य वैश्विक एल्युमिनियम और वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल खनिजों का निर्यात करना नहीं बल्कि राज्य में वैल्यू एडिशन, औद्योगिकीकरण और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए भूमि, जल, बिजली, लॉजिस्टिक्स, आधारभूत संरचना और सभी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर ग्रीन मेटल्स और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिकीकरण का महत्व लगातार बढ़ रहा है तथा ओडिशा इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एल्युमिनियम से आगे भी बढ़ेगी साझेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएचसी समूह के साथ यह सहयोग केवल एल्युमिनियम परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों पक्ष अनुसंधान एवं विकास , मेटलर्जी, डिजिटल प्रौद्योगिकी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर तथा उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे ओडिशा में अत्याधुनिक तकनीक आएगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, औद्योगिक क्षमता मजबूत होगी तथा उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अडानी समूह ने जताया भरोसा
अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अडानी ने कहा कि यह परियोजना ओडिशा की औद्योगिक क्षमता में अडानी समूह के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ओडिशा को दीर्घकालिक विनिर्माण केंद्र के रूप में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अडानी समूह और आईएचसी समूह का संयुक्त उद्यम हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से एक एकीकृत एल्युमिनियम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा, जो रोजगार बढ़ाने, वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने और भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
करण अडानी ने कहा कि ओडिशा के पास देश का सबसे बड़ा बॉक्साइट भंडार और 50 प्रतिशत से अधिक लौह अयस्क संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे यह बड़े औद्योगिक निवेशों के लिए सबसे आकर्षक राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण, वैधानिक स्वीकृतियों और अन्य प्रारंभिक प्रक्रियाओं में लगभग 12 से 18 महीने लगेंगे, जबकि परियोजना के निर्माण और संचालन शुरू होने में लगभग साढ़े तीन वर्ष का समय लगेगा।
आईएचसी ने ओडिशा को बताया रणनीतिक साझेदार
आईएचसी समूह के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सैयद बसर शुएब ने कहा कि यह समझौता भारत और यूएई के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि आईएचसी भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले क्षेत्रों, विशेषकर खनन, महत्वपूर्ण खनिजों और औद्योगिक विनिर्माण में दीर्घकालिक निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग के माध्यम से कंपनी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, ऊर्जा परिवर्तन को गति देने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निवेश कर रही है। आईएचसी समूह के मुख्य रणनीतिक अधिकारी (सीएसओ) पीटर अब्राम ने कहा कि यह साझेदारी केवल एक व्यावसायिक निवेश नहीं बल्कि दीर्घकालिक विकास का साझा संकल्प है। उनके अनुसार यह सहयोग प्रौद्योगिकी, अवसंरचना, वित्तीय सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा।
सरकार ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
उद्योग मंत्री सम्पद चंद्र स्वाईं ने कहा कि यह निवेश ओडिशा की उद्योग-अनुकूल नीतियों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समयबद्ध स्वीकृतियां प्रदान करेगी तथा सभी आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करेगी। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह निवेश ओडिशा में वैल्यू एडेड एल्युमिनियम विनिर्माण को नई गति देगा और भारत की वैश्विक एल्युमिनियम आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को और मजबूत करेगा। समारोह में मुख्य सचिव अनु गर्ग, अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा, इपीकाल की प्रबंध निदेशक अबोली सुनील नरवणे, आईएचसी समूह के सीईओ सैयद बसर शुएब, आईआरएच के सीईओ अली अल रश्दी, आईएचसी समूह के वरिष्ठ अधिकारी हेसाम और अब्दुल्ला अल रश्दी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में निवेशक मौजूद रहे।
देश के मैटालर्जी क्षेत्र के सबसे बड़े निवेश प्रस्तावों में शामिल यह परियोजना ओडिशा की औद्योगिक तस्वीर बदलने, राज्य को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होने की उम्मीद है।












