
नई दिल्ली: देश में आज यानी 1 जुलाई से VB G-RAM-G कानून लागू हो गया है। इस कानून के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव होंगे। केंद्र की मोदी सरकार इस कानून के माध्यम से साल 2047 तक एक ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना चाहती है। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। VB G-RAM-G कानून के तहत गांवों में विकास कार्यों के लिए चार प्राथमिकताएं तय की गई हैं। जिनमें जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, आजीविका से जुड़े काम और मौसमी घटनाओं से जुड़े काम शामिल हैं।
VB G-RAM-G कानून की 4 प्राथमिकताएं
इस कानून की पहली प्राथमिकता जल सुरक्षा है। इसके तहत गांवों में जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों को पुनर्जीवित करने के काम को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी प्राथमिकता है ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर। जिसके तहत ग्रामीण सड़कों, सार्वजनिक भवनों, स्कूलों के विकास, स्वच्छता प्रणालियों और सौलर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम और आवास योजनाओं पर जोर होगा। तीसरी प्राथमिकता आजीविका से जुड़े काम हैं। जिनमें इस कानून को कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास से भी जोड़ गया है।
इस कानून के तहत चौथी प्राथमिकता मौसमी घटनाओं से जुड़े काम है। जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को आपदा के समय तैयार रखने पर भी जोर दिया गया है। इसमें तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाएं और जंगलों की आग बुझाने जैसे काम भी शामिल किए गए हैं।
100 दिनों की जगह अब मिलेगा 125 दिनों का काम
इस नये कानून से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों तक काम मिलता था। नये कानून में इसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। कानून में ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। जिसके आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी।
VB G-RAM-G यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 में गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है। इसके तहत मजदूरों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग और निगरानी, मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग के साथ रियल-टाइम डैशबोर्ड, एआई-सक्षम विश्लेषण और सोशल ऑडिट तंत्र शामिल हैं। काम की साप्ताहिक जानकारी स्वचालित रूप से तैयार की जाएगी और भौतिक-डिजिटल दोनों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। अब राज्य ही वर्ग और स्थानीय विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी और आवश्यकतानुसार बंटवारा सुनिश्चित करेंगे।