अगर आपकी भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। कई लोग अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए एफडी में निवेश करते हैं। ऐसे में मैच्योरिटी के बाद समय पर पैसा मिलना हर ग्राहक का अधिकार है। इसी अधिकार को मजबूत करते हुए केरल हाई कोर्ट ने 2 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि बैंक तकनीकी कारणों का हवाला देकर ग्राहकों की जमा राशि रोक नहीं सकते। अगर ऐसा होता है तो बैंक को न सिर्फ मूल रकम लौटानी होगी, बल्कि ब्याज और मुआवजा भी देना पड़ सकता है।
एफडी भुगतान से इनकार पर बैंक को ब्याज समेत राशि लौटाने का आदेश
यह मामला केरल के त्रिशूर जिले के रहने वाले श्री सेतुमाधवन का है। उन्होंने बैंक में 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थी, जो 2 जून 2015 को मैच्योर हो गई थी। लेकिन जब वह अपनी एफडी की रकम लेने बैंक पहुंचे, तो बैंक ने तकनीकी कारण बताते हुए भुगतान करने से इनकार कर दिया। कई कोशिशों के बावजूद जब उन्हें पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद 31 दिसंबर 2021 को आयोग ने बैंक को 5 लाख रुपये की एफडी राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश पारित किया। साथ ही ग्राहक को हुई परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया।
हालांकि, आयोग के आदेश के बावजूद बैंक ने भुगतान नहीं किया। इसके बजाय करीब 825 दिनों की देरी से केरल हाई कोर्ट में अपील दायर की। बैंक ने दलील दी कि लंबे समय तक उसका प्रबंधन एडमिनिस्ट्रेटर के अधीन रहने के कारण समय पर अपील दाखिल नहीं की जा सकी। हाई कोर्ट ने बैंक की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि जनता का पैसा संभालने वाले बैंक अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। अदालत ने कंज्यूमर कमीशन के फैसले को बरकरार रखा और बैंक को 5 लाख रुपये की एफडी राशि, 12 प्रतिशत ब्याज और 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही भुगतान के लिए छह महीने का समय भी दिया गया।












