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खाड़ी में तनाव के बीच सप्लाई चेन बरकरार: तीन दिन में भारत संबद्ध जहाज होर्मुज से गुजरे, 15 अभी भी कतार में

तनावपूर्ण होर्मुज की खाड़ी से 28 फरवरी के बाद अब तक 44 जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, जिनमें ज्यादातर भारत के लिए तेल, गैस और उर्वरक ले जा रहे थे। फारस की खाड़ी में अभी 15 जहाज और इंतजार कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका MoU के बाद गतिविधि तेज हुई।

Published by
कुलदीप सिंह

खाड़ी में तनाव बना हुआ है। लेकिन, फिर भी भारत लगातार भारत के जहाज तेल और गैस लेकर भारत आ रहे हैं। इसी क्रम में पिछले तीन दिनों में होर्मुज की खाड़ी से नौ जहाज गुजरे हैं। इनमें से 7 भारत के लिए माल ले जा रहे थे। इससे कुल संख्या बढ़कर 44 हो गई है। ये आंकड़े 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष के बाद के हैं, जब तक शनिवार तक ये जहाज सुरक्षित निकल चुके थे। इन नौ जहाजों में चार भारतीय झंडे वाले थे और पांच विदेशी है।

अभी और कितने जहाज इंतजार कर रहे हैं?

फारस की खाड़ी में अभी 15 जहाज और हैं जो भारतीय हित से जुड़े हैं और सुरक्षित रास्ता निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें 10 भारतीय झंडे वाले जहाज शामिल हैं। चार जहाज उर्वरक ले जा रहे हैं और एक ऊर्जा से संबंधित मालवाहक है। शनिवार को भारतीय झंडे वाला बल्क कैरियर APJ प्रीति 2 65,000 टन उर्वरक लेकर होर्मुज से गुजरा। इससे एक दिन पहले दो और जहाज निकले- देश सुरक्षा जिसमें एक लाख टन से ज्यादा क्रूड ऑयल था, और प्रभु पार्वती जिसमें 18,732 टन माल लदा था।

संख्या में बढ़ोतरी कब हुई?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 17 जून के बीच सिर्फ 19 बार जहाज गुजरे। लेकिन 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच MoU साइन होने के बाद पिछले 10 दिनों में भारत से जुड़े 25 जहाज निकल चुके हैं।

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किस तरह के जहाज ज्यादा गुजरे?

जहाजों की गतिविधि पर नजर रखने वाले लोगों के अनुसार, मार्च के पहले से अब तक गुजरे जहाजों में 15 बल्क कैरियर थे, 13 एलपीजी कैरियर, 11 क्रूड टैंकर और दो एलएनजी कैरियर निकले।

पश्चिम एशिया में फिर फैला तनाव

इस दौरान पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ा। गुरुवार को होर्मुज में एक जहाज पर हमला होने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमले किए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। भारत के लिए यह रूट बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से तेल, उर्वरक और दूसरे जरूरी माल आता है। इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से सप्लाई चेन पर असर कम होता है।

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