खाड़ी संकट के बीच एक बार फिर से अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी पुष्टि करते हुए आरोप लगाया कि इससे एक दिन पहले (शुक्रवार को) ईरान ने एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला किया था, जिसके जबाव में यह हमला किया गया।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, सेंटकॉम का कहना है कि ये हमले ईरान की कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ लगातार आक्रामकता का सीधा जवाब थे। हमलों में ईरानी मिलिट्री सर्वेलेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइनलेयर क्षमताओं को निशाना बनाया गया।
अमेरिका-ईरान के मध्य बातचीत के बीच हुआ यह हमला
यह तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका और ईरान के बीच एक MOU पर बातचीत चल रही थी। इसका मकसद चल रहे युद्ध को खत्म करना था, जो बहुत लोकप्रिय नहीं था। इस युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं और हजारों आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज पर ड्रोन से हमला किया। इसके बाद अमेरिका ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। शनिवार को फिर ईरान की तरफ से एक और ड्रोन हमला हुआ, जिसमें M/T Kiku नाम का पनामा-फ्लैग्ड टैंकर प्रभावित हुआ। इस टैंकर में 20 लाख बैरल से ज्यादा क्रूड ऑयल था। सेंटकॉम ने बताया कि एवर लवली जहाज पर हमले के बाद ईरान को सीजफायर का मौका दिया गया था, लेकिन उसने नहीं माना और फिर हमला किया।
ट्रंप ने ईरान को नक्शे से मिटाने की दी धमकी
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम वो काम पूरा करेंगे जो हमने अच्छे से शुरू किया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो ईरान अब नहीं रहेगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कहा था – “हिंसा का जबाव हिंसा से दिया जाएगा।”
MOU पर बात
यह समझौता अमेरिका, ईरान और लेबनान में सभी मिलिट्री ऑपरेशंस को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने का प्रावधान रखता है। लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह भी शामिल है। लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर असहमति बनी हुई है जैसे ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट में टोल्स और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम जैसे सवाल।
















