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इजरायल का सख्त ऐलान: दक्षिणी लेबनान से सैनिक नहीं हटाएंगे, IDF बनी रहेगी

इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने साफ कहा कि IDF दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। अमेरिका का कोई दबाव नहीं। ईरान-अमेरिका शांति समझौते को बड़ा झटका।

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कुलदीप सिंह

इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने साफ कह दिया है कि उनके सैनिक दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे। तेल अवीव में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से कोई दबाव नहीं है और IDF वहां बनी रहेगी। यह बयान ईरान के साथ चल रही शांति कोशिशों को और मुश्किल बना रहा है।

क्या कहा काट्ज नेकाट्ज ने स्टेज पर इंटरव्यू देते हुए कहा, “IDF तैयार हैं और हम पीछे नहीं हट रहे। हमने पहले ही ऐलान कर दिया था कि हम नहीं हटेंगे। अभी तक अमेरिका की तरफ से लेबनान से वापसी की कोई मांग नहीं आई है। यह हमारे लिए राजनीतिक उपलब्धि है।” प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इसी लाइन पर हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच समझौता

पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें नाजुक युद्धविराम को बढ़ाया गया और 60 दिनों की बातचीत का रास्ता खोला गया, ताकि स्थायी शांति हो सके। ईरान के लिए लेबनान में लड़ाई का खत्म होना इस डील का अहम हिस्सा है। ईरान कहता है कि लेबनान में युद्ध बंद होना उतना ही जरूरी है जितना ईरान में।

लेकिन इजरायल दक्षिणी लेबनान में बड़ा इलाका कब्जे में रखे हुए है, जिसे वह “सुरक्षा जोन” कहता है। ईरान चाहता है कि इजरायल अपने सैनिक वहां से पूरी तरह हटा लें।

लेबनान में मौजूदा हालात

अभी भी वहां छोटी-मोटी घटनाएं हो रही हैं। बुधवार को इजरायली ड्रोन ने कफर रुम्मान के पास एक वाहन पर हमला किया, जिसमें दो लोग मारे गए। लेबनानी मीडिया और हिजबुल्लाह ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया। इजरायली सेना ने कहा कि उन्होंने नबातिएह के पास दो हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया और “तत्काल खतरे” को दूर किया।

लेबनान सरकार और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। इसमें इजरायल धीरे-धीरे इलाके लेबनानी सेना को सौंपने की बात कर रहा है, ताकि हिजबुल्लाह वहां न रह सके। लेकिन ये बातचीत हिजबुल्लाह को शामिल किए बिना हो रही है, इसलिए इसमें सफलता की उम्मीद कम दिखती है।

लड़ाई कैसे शुरू हुई

मार्च में हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे, जो ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की हत्या का जवाब था। इसके बाद इजरायल ने लेबनान में घुसकर कार्रवाई की। अब तक लेबनान में 4200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। हिजबुल्लाह के हमलों में 36 इजरायली सैनिक और 3 आम नागरिक मारे गए। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। इजरायल का कहना है कि सुरक्षा जोन जरूरी है ताकि हिजबुल्लाह दोबारा हमला न कर सके। ईरान इसे अपना मुद्दा मानकर अमेरिका से जोड़ रहा है।

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