
प्रतीकात्मक तस्वीर
केंद्र की भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को राज्यसभा में एक और बड़ी मजबूती मिली है। मिजोरम के राज्यसभा सांसद लालतलुआंगकिमा ने घोषणा की है कि वे राज्य और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार का समर्थन करेंगे। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल नहीं होगी और संसद में स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमिका निभाती रहेगी।
लालतलुआंगकिमा मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के नेता हैं। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता मिजोरम का विकास और लोगों का कल्याण है। इसी आधार पर वे संसद में अपना रुख तय करेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी के लोकसभा सांसद रिचर्ड वानलालहमंगाइहा भी संसद में स्वतंत्र और तटस्थ भूमिका निभाएंगे। हालांकि जहां राज्य और जनता के हित का सवाल होगा, वहां केंद्र सरकार को उनका समर्थन मिलेगा। यह समर्थन ऐसे समय में मिला है जब हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में NDA ने अच्छा प्रदर्शन किया है। 27 सीटों पर हुए चुनाव में गठबंधन ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद राज्यसभा में NDA की संख्या 152 तक पहुंच गई थी। अब मिजोरम से मिले इस समर्थन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 153 हो गया है।
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है, लेकिन संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। इसके लिए करीब 164 सांसदों का समर्थन चाहिए। वर्तमान में NDA इस आंकड़े से 11 सीट दूर है। इसलिए मिजोरम से मिला यह समर्थन राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिजोरम में हुए राज्यसभा चुनाव में लालतलुआंगकिमा ने 36 में से 26 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को हराया था। मिजोरम विधानसभा में ZPM के 27 विधायक हैं, जबकि एमएनएफ के 10 विधायक हैं। भाजपा के दो और कांग्रेस का एक विधायक है। राज्यसभा में NDA की बढ़ती ताकत आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में मदद कर सकती है।