NEET-UG के पेपर को दोबारा से लीक होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ टेलीग्राम दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया। इस पर कोर्ट ने सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि भारत सरकार के उस आदेश को सही माना जिसमें RE-NEET 2026 परीक्षा के मद्देनजर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। परीक्षा 21 जून को होनी है और बैन 22 जून तक रहेगा।
क्या था पूरा मामला?
सरकार ने 16 जून को टेलीग्राम पर पांच दिन का अस्थायी बैन लगाया था। इसका मकसद परीक्षा से पहले पेपर लीक और फर्जी सामग्री फैलने से रोकना था। टेलीग्राम ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया। अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने कहा कि सरकार के पास यह पावर है। आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत केंद्र सरकार पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा सकती है।
कोर्ट ने पाया कि सरकार ने उपलब्ध जानकारी पर ठीक से विचार किया था। प्रक्रिया पूरी तरह से फॉलो की गई। आदेश की आपातकालीन वजहें पर्याप्त थीं। सूचना न देने का टेलीग्राम का तर्क कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि विचार-विमर्श की कोई कमी नहीं थी। ऐप को ‘सूचना’ की परिभाषा से बाहर रखने का कोई आधार नहीं है। पांच दिन का बैन बरकरार रहेगा।
सरकार की तैयारी
सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि टेलीग्राम को पहले बुलाया गया था। उनकी बात सुनी गई और जांच के नतीजे रिकॉर्ड में हैं। कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली कमेटी ने इस मामले की सुनवाई की थी।
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टेलीग्राम पर पहले के आरोप
टेलीग्राम पर पहले भी पेपर लीक और फर्जी पेपर सर्कुलेट करने के आरोप लगते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जालसाज और साइबर ठग भी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
टेलीग्राम के खास फीचर्स
टेलीग्राम पर एक ग्रुप में 2 लाख सदस्य तक जोड़े जा सकते हैं। भारी फाइलें सेव की जा सकती हैं। बिना मोबाइल नंबर के भी अकाउंट बनाया जा सकता है। ये फीचर्स ही इसे पेपर लीक जैसी गतिविधियों के लिए आसान बनाते हैं। टेलीग्राम और व्हाट्सएप में प्राइवेसी के मामले में काफी अंतर है। टेलीग्राम यूजरनेम की सुविधा भी देता है।

















