पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तानी सरकार वहां के लोगों पर अत्याचार कर रही है। हाल के दिनों में जब लोगों ने इंसाफ की मांग की तो उन पर बर्बरता की गई। इसी को लेकर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (जेएएसी) ने अपनी पुरानी मांगों को दोहराते हुए एक चार्टर जारी किया है। समिति ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग हो रहा है, जबकि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना चार्टर ऑफ डिमांड्स शेयर किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार और पीओजेके प्रशासन दोनों ने पहले इन मांगों को मान लिया था। लेकिन अब राजनीतिक पार्टियां इन मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं।
जेएएसी का बयान
जेएएसी ने लिखा, “यह हमारा चार्टर ऑफ डिमांड्स है, जिसे पाकिस्तान सरकार और पीओजेके सरकार दोनों ने माना था। अब सभी राजनीतिक पार्टियां इन मांगों से हटकर लोगों को कुचलने की योजना बना रही हैं और इसके लिए बल का सहारा ले रही हैं।”
मुख्य मांगें क्या हैं?
जेएएसी की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- शासक वर्ग को मिली विशेष सुविधाओं को खत्म करना
- पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों को समाप्त करना
- फ्री स्वास्थ्य सेवाएं और समान शिक्षा व्यवस्था
- एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण
- पीओजेके में नौकरियों में पाकिस्तान आधारित शरणार्थियों के लिए कोटा खत्म करना
ये मांगें लंबे समय से चली आ रही हैं और लोग इन्हें लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
आंदोलन पर जेएएसी का पक्ष
जेएएसी ने इसे पूरी तरह लोगों का अपना आंदोलन बताया है। उसने पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल इस्तेमाल करने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, फिर भी निर्दोष, निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई जा रही हैं। वे पूछते हैं कि चार्टर की किस मांग को लेकर ऐसा किया जा रहा है।
सरकार के दावों पर भी सवाल उठाया गया। जेएएसी ने कहा कि जो मंत्री मांगों को लागू करने की बात करते हैं, उन्हें सबूत भी पेश करने चाहिए। उनका आरोप है कि सत्ता में बैठे लोग आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते, खासकर जब अपनी सुविधाएं प्रभावित होती हैं।
हिंसा और नुकसान का आरोप
समिति का कहना है कि आंदोलन के दौरान उनके दर्जनों समर्थक मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और कई लोग लापता हैं। घायलों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद जेएएसी ने साफ कहा कि वे शांतिपूर्ण रास्ते से ही आगे बढ़ेंगे। जेएएसी का कहना है कि हम शांत रहेंगे, शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकार हासिल करेंगे और इसमें कोई समझौता नहीं होगा।
















