लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 9 साल पहले उत्तर प्रदेश की हालत यह थी कि राजधानी में पुलिस की जमीन पर कुख्यात माफिया ने कब्जा कर रखा था। तत्कालीन सरकार के सरंक्षण में वह माफिया इतना शक्तिशाली हो गया था कि पुलिस की हिम्मत नहीं थी कि वह अपनी जमीन खाली करा सके। लेकिन, डबल इंजन सरकार का बुलडोजर देखते ही माफिया ने जमीन सरेंडर कर दी। आज उसी जमीन पर स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की भव्य इमारत खड़ी है।
माफिया के कब्जे वाली भूमि पर बना स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में स्थापित स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट केवल एफएसएल और साइबर सिक्योरिटी का केंद्र नहीं है, यह आधुनिक तकनीकों से जुड़े सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स का भी प्रमुख संस्थान बन चुका है। उन्होंने 9 वर्ष पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा कि यह भूमि उत्तर प्रदेश पुलिस की थी, जिस पर लखनऊ के एक कुख्यात माफिया का कब्जा था। वर्ष 2017 में फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस होने पर इस भूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। बुलडोजर कार्रवाई के बाद माफिया ने स्वयं भूमि सरकार को सौंप दी और आज उसी स्थान पर विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नए आपराधिक कानूनों के तहत 7 वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक एविडेंस अनिवार्य है और उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मोबाइल फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था भी की जा चुकी है।
ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण से बढ़ेगी सामरिक शक्ति और राजस्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 200 एकड़ लैंड मुफ्त उपलब्ध कराई। ब्रह्मोस की ताकत देखिए, जिस दिन पहली ब्रह्मोस मिसाइल निकली, उसके तीसरे दिन पाकिस्तान पर बरस पड़ी थी। जमीन की कीमत क्या है, राष्ट्र की सुरक्षा से बढ़कर क्या हो सकता है? यह भूमि मुफ्त में जरूर दी गई है, लेकिन जब प्रतिवर्ष लगभग 150 ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण होगा तो उत्तर प्रदेश को लगभग 135 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में प्राप्त होंगे। उत्तर प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के तहत लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में रक्षा उत्पादन की नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। जहां 20 से 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद थी, वहीं अब तक 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

















