मध्य प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने संदिग्ध आतंकी नेटवर्क के खिलाफ शुरू किए गए अभियान में लगातार तीसरी बड़ी सफलता हासिल करते हुए राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव पुत्र युनुस को गिरफ्तार किया है, जिसके कि आतंकवादी नेटवर्क के तार हरियाणा के नूंह एवं पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। इससे पहले भोपाल से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह और उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला को पकड़ा जा चुका है। तीन दिनों में हुई इन तीन गिरफ्तारियों ने सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे कई सुराग दिए हैं, जिनसे एक बहुराज्यीय नेटवर्क की तस्वीर उभरने लगी है।
आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों के बीच संपर्कों की एक श्रृंखला थी और डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया नेटवर्क तथा अन्य माध्यमों के जरिए देश विरोधी साजिशों को आगे बढ़ाया जा रहा था। एटीएस की पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि उसे पाकिस्तान से ‘शहीद खालिद सैफुल्लाह’ का नाम दिया गया था, जिससे वह उसी तर्ज पर जिहादी गतिविधियों को अंजाम दे सके।
देवबंद से पकड़ा गया नईम अब्दुल्ला
उल्लेखनीय है कि पूरे मामले की शुरुआत राजधानी भोपाल के काजी कैंप इलाके से हुई, जहां 11 जून की रात एटीएस ने गुप्त कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह को हिरासत में लिया था। फराज से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद एटीएस की टीम उत्तर प्रदेश के देवबंद पहुंची, जहां से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक नईम और फराज के बीच लंबे समय से संपर्क थे। बताया जा रहा है कि नईम ने ही फराज को विदेशी हैंडलर्स से जोड़ने में भूमिका निभाई थी। जांच में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्कों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। नईम की गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों को नेटवर्क की संरचना को समझने में और मदद मिली।
अलवर से गिरफ्तारी ने बढ़ाई जांच की रफ्तार
जांच की सबसे नई और अहम कड़ी राजस्थान के अलवर जिले में सामने आई। एटीएस ने टपूकड़ा थाना क्षेत्र से शाकिर मेव को गिरफ्तार किया, उसका घर नाखनौल गांव में है। जांच में सामने आया कि वह नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कथित तौर पर “सेकंड हेड कमांडर” के रूप में सक्रिय था। लोगों को जोड़ने, गतिविधियों का समन्वय करने और नेटवर्क को सक्रिय रखने में भी उसकी भूमिका थी। गिरफ्तारी के बाद उसे मध्य प्रदेश लाया गया, जहां न्यायालय ने उसे 20 जून तक आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की रिमांड पर भेज दिया है।
भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों के अनुरोध पर स्थानीय पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद संयुक्त टीम ने टपूकड़ा क्षेत्र में आरोपी शाकिर के घर पर तलाशी अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां मामले से जुड़े एक पाकिस्तानी हैंडलर को भी अपने साथ लेकर गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी राजस्थान में एक मस्जिद में मौलवी के रूप में रह रहा था।
गौरतलब है कि भिवाड़ी पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है। अगस्त 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चौपानकी थाना क्षेत्र के सारेकला जंगलों में कथित हथियार प्रशिक्षण शिविर का भंडाफोड़ करते हुए अलकायदा मॉड्यूल से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, टपूकड़ा क्षेत्र में भी पूर्व में एक युवक के पाकिस्तान को खुफिया सूचनाएं भेजने के आरोप में कार्रवाई की जा चुकी है।
हमले की साजिश और ट्रेनिंग एंगल पर भी फोकस
एटीएस के अनुसार पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि कुछ आरोपी मार्शल आर्ट जैसी ट्रेनिंग लेने और विदेश जाने की योजना पर भी काम कर रहे थे। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इन गतिविधियों का उद्देश्य क्या था और इनके पीछे कौन लोग सक्रिय थे। साथ ही संभावित हमलों, कट्टरपंथी नेटवर्क और युवाओं को जोड़ने की कथित कोशिशों की भी जांच की जा रही है। जांच अधिकारी फिलहाल सभी पहलुओं को जोड़कर पूरे नेटवर्क की संरचना समझने का प्रयास कर रहे हैं।











