नई दिल्ली। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में चल रहे घमासान के बीच रविवार को पार्टी के सभी बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की और एक पत्र सौंपकर सदन में अलग स्थान देने की मांग की। इसके साथ सभी बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टीमें विलय का फैसला किया है।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया को बताया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से निर्वाचित 20 सांसदों ने अध्यक्ष को एक पत्र सौंपकर लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति मांगी है।
काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि ये 20 सांसद पार्टी की कुल संसदीय ताकत के दो-तिहाई से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों ने मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “हम देशहित में काम करेंगे और आगे प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए के साथ मिलकर सहयोग करेंगे।”
इसलिए किया पार्टी में विलय का फैसला
उल्लेखनीय है कि नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी मुख्य रूप से त्रिपुरा आधारित एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। पूर्वोत्तर के राज्यों, विशेषकर त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में इस पार्टी का राजनीतिक आधार माना जाता है। संसद के नियमों के मुताबिक सदन में सीधे किसी अलग गुट को मान्यता नहीं मिल सकती और ऐसा करने पर सांसदी जाने का खतरा रहता है, इसलिए सदस्यता बचाने के लिए किसी मूल दल के साथ विलय करना कानूनी रूप से अनिवार्य था। बागी सांसदों ने यह कदम दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए उठाया है। इस फैसले से अपनी सांसदी बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इस विलय के बाद यह बागी गुट एक नए तकनीकी और कानूनी ढांचे के साथ केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन सौंप देगा।

















