तमिलनाडु से एक बेहद गंभीर खबर आई है। राज्य के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (Joseph Vijay) की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने और तानाशाही वाला रवैया अपनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। सरकारी केबल नेटवर्क अरसु केबल टीवी से 3 मेन न्यूज चैनल के अचानक ब्लैकआउट (प्रसारण बंद) होने के बाद राज्य में नया विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों एआईएडीएमके (AIADMK) और बीजेपी (BJP) ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या और अघोषित आपातकाल करार दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
तमिलनाडु से आई रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के सरकारी स्वामित्व वाले केबल टेलीविजन नेटवर्क ‘अरसु केबल’ से 9 जून 2026 से 3 बड़े तमिल समाचार चैनलों का प्रसारण पूरी तरह से रोक दिया गया है। इन चैनलों के नाम हैं, ‘पॉलीमर न्यूज’, ‘न्यूज तमिल 24×7’ और ‘तमिल जनम’। आम लोगों सहित विपक्ष का आरोप है कि इन चैनलों को इसलिए निशाना बनाया गया है क्योंकि ये लगातार जमीन पर टीवीके सरकार के मंत्रियों के कामकाज, राज्य में चरमराती कानून-व्यवस्था, बिजली कटौती की समस्या, महिलाओं की सुरक्षा और बढ़ते ड्रग्स (नशीले पदार्थों) के खतरे पर बेबाक रिपोर्टिंग कर रहे थे।
राज्य सरकार ने बनाया तकनीकी खराबी का बहाना
शुरुआत में TVK सरकार के नेताओं और अधिकारियों ने इस ब्लैकआउट को एक मामूली तकनीकी खराबी बताने की कोशिश की। सरकार का तर्क था कि कुछ विशेष सेट-टॉप बॉक्स में आई दिक्कतों के कारण इन चैनलों का प्रसारण प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस दलील पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सवाल उठाया कि, अगर यह वाकई एक तकनीकी समस्या है, तो यह खराबी केवल इन्हीं तीन विशिष्ट चैनलों में क्यों आई? अरसु केबल पर चल रहे बाकी अन्य चैनल इससे प्रभावित क्यों नहीं हुए?
बीजेपी सहित विपक्षी पार्टियों ने उठाए सवाल
अन्नामलाई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल और केवल राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई है क्योंकि इन चैनलों ने राज्य में बड़े पैमाने पर चल रही बिजली कटौती और सरकार की नाकामी को जनता के सामने उजागर किया था। वहीं एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ई.पी.एस.) ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की खूब आलोचना की। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले एक और प्रमुख चैनल ‘पुथिया थलाइमुराई’ के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था।
ई.पी.एस. ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, ‘ऐसा लगता है कि तमिलनाडु में इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया की निगरानी के लिए कोई गुप्त सेंसर बोर्ड काम कर रहा है। एक निजी फर्म मिस्टर ऑफिस के नाम का उपयोग करके मीडिया घरानों को धमका रही है और कहा जा रहा है कि इसी फर्म को अरसु केबल का काम सौंपा गया है।’ उन्होंने सरकार से मांग की कि इन तीनों चैनलों का प्रसारण तुरंत बिना किसी बाधा के बहाल किया जाए।
एक यूट्यूबर की गिरफ्तारी पर भी उठे सवाल
यह विवाद केवल चैनलों के बंद होने तक सीमित नहीं है। इससे ठीक 2 दिन पहले, टीवीके सरकार और उसके मंत्रियों की आलोचना करने वाले वीडियो बनाने के आरोप में मशहूर यूट्यूबर मारीदास को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, सैदापेट मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिमांड की मांग को खारिज करते हुए उन्हें पर्सनल बॉन्ड पर रिहा कर दिया।
बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जोसेफ विजय की यह सरकार कुछ और नहीं बल्कि ‘द्रमुक (DMK) का 2.0 वर्जन’ है। उन्होंने कहा, ‘विजय जोसफ एक ऐसी सरकार चला रहे हैं जो लोकतंत्र की हत्या और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने में माहिर है। सरकार के ऐसे लोकतंत्र विरोधी कृत्यों की जितनी निंदा की जाए कम है। नई सरकार भी पिछली सरकार की तरह लोगों की आवाज दबाने का काम कर रही है।’
कांग्रेस वाला इमेरजेंसी माइंडसेट
आलोचकों का भी यही मानना है कि नई सरकार अपनी पूर्ववर्ती एम.के. स्टालिन की द्रमुक सरकार के नक्शेकदम पर ही चल रही है, जो आलोचनाओं के प्रति बिल्कुल भी सहिष्णु नहीं थी। सोशल मीडिया पर लोग इसकी तुलना इंदिरा गांधी के समय लागू हुए आपातकाल से कर रहे हैं, जहां निष्पक्ष मीडिया को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया था। एक शख्स ने सोशल मीडिया पर लिखा ‘टीवीके में भी कांग्रेस वाला इमेरजेंसी माइंडसेट दिखाई दे रहा है, फ्री स्पीच की वकालत करने वाला गैंग अब कहां है?’

















