अफगानिस्तान में महिलाएं एक प्रकार से सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। इसके बावजूद उन पर तमाम बंदिशें लग रही हैं। जो भी थोड़ा बहुत वे जीती हैं, उनमें भी मोरलिटी पुलिस अपना दखल देती है और उनका जीवन छीन लेती है। हेरात में महिलाओं के दमन की कहानी सामने आ रही है। यहां एक बार फिर से लड़कियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं।
हेरात से महिलाओं ने यह बताया कि कैसे तालिबान की मोरलिटी पुलिस उन लड़कियों को गिरफ्तार कर रही है, जिन्होंने तालिबान के फतवे के अनुसार कपड़े नहीं पहने हुए थे। मीडिया को बताया कि लड़कियों को तालिबान के सदस्यों ने manteau coats पहनने के कारण गिरफ्तार कर लिया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कैसे तालिबान की मोरलिटी पुलिस सड़कों पर जांच कर रही थी, और कैसे वह महिलाओं को हिरासत में ले रही थी। विरोध करने पर महिलाओं को राइफल के बट से पीटा गया। कुछ महिलाएं मानसिक और शारीरिक ट्रॉमा के चलते सड़क पर ही गिर गईं। दो दिनों में जिस प्रकार से सड़कों से महिलाओं को उठाने और हिरासत में लिए जाने का अभियान चलाया गया है, उसके चलते अब सड़कों पर महिलाएं हैं ही नहीं।
कई महिलाओं का कहना है कि वे अब जरूरी चीजें खरीदने के लिए भी डर के चलते घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं। शनिवार से ही हेरात में तालिबान ने गिरफ्तारी का अभियान चला रखा है, उन्हें आदेश दिया जा रहा है कि वे चादर या बुर्का पहनकर ही बाहर निकलें, और जो यह नहीं करेंगी उन्हें जेल में ठूंस दिया जाएगा। गाड़ियों को रोक-रोक कर देखा जा रहा है कि लड़कियों ने चादर डाली है या नहीं। हेरात में ऐसी ही सुबह अलमास-ए-शर्क कॉम्प्लेक्स में गिरफ्तारियों के गवाह ने बताया वह भी उस दिन चादर डाले हुए थी, मगर जिन महिलाओं ने विरोध किया, उन्हें बहुत बुरी तरह से पीटा गया और उन्हें जबरन गाड़ियों में बैठाया गया।
गिरफ्तार की गई महिलाओं में कई बुजुर्ग भी थीं, और उनमें से कई तो डर के कारण ही बेहोश हो गईं। उसके अनुसार एक दिन पहले तालिबान की Ministry for the Propagation of Virtue and Prevention of Vice के लोग, मोटर साइकिल पर बैठकर यही गिरफ्तार करने के लिए महिलाओं के लिए पेट्रोलिंग कर रहे थे। यह भी कहना है कि महिलाओं को उनके परिजनों द्वारा जैसे त्याग दिया गया है।
एक लड़की ने मीडिया को बताया कि जब आप घर से और छत से देखते हैं तो आपको एक और महिला को खोजना होगा। सड़क पर महिलाएं हैं ही नहीं और अब तो छोटी-छोटी लड़कियां चादर में हैं।
इस कदम की निंदा
तालिबान सरकार के इस कदम की निंदा हो रही है। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के कार्यकारी स्थायी प्रतिनिधि नासिर अहमद ने एक्स पर इन गिरफ्तारियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि हेरात में जो गिरफ्तारियां हो रही हैं, वह इस्लाम के सिद्धांतों के विपरीत हैं और अफगानिस्तान के लोगों की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है। कैसे तालिबान की मोरलिटी पुलिस खुद को मरहम समझ सकती है कि वे जबरन बाजार और सड़कों से महिलाओं को गिरफ्तार करके गाड़ियों में बैठा सके। यह सब तब हो रहा है जब जेल में महिलाओं के साथ हिंसा, उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न की विश्वनीय और डाक्यमेन्टेड रिपोर्ट्स आ रही हैं और साथ ही कैसे तालिबान के लड़ाके जबरन निकाह कर रहे हैं।
महिला संगठनों ने की निंदा
महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी तालिबान सरकार के इस कदम की निंदा की है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों के खिलाफ और महिलाओं की गरिमा का उल्लंघन बताया है। ऐसे फतवे, अफगानिस्तान में मूलभूत अधिकारों का हनन है।
महिलाओं के साथ तालिबान की यह घृणा नई नहीं है, वह उन्हें इस्लाम के नाम पर दबाते हैं। अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक परिदृश्य से बाहर ही कर दिया है, फिर भी अपने सीमित स्थान में भी जब वे बाहर निकलती हैं, तो उन्हें किसी न किसी बहाने से जेल भेज दिया जाता है और एक प्रकार से उनके बाहर निकलने को हतोत्साहित किया जाता है।
महिलाओं की आवाज को “awrah” घोषित कर दिया गया, और उन्हें ताकीद दी गई है कि वे जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर न निकलें। उसी कानून में यह दावा किया गया था कि महिलाओं को धार्मिक कविता या कुरान का पाठ करते हुए सुनना जायज नहीं है।

















