कर्नाटक

बेंगलुरु: ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ नाटक का हुआ मंचन, जीवंत अभिनय से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध, मुक्तकंठ से हुई प्रशंसा

बेंगलुरु में संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित हिंदी नाटक ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का सफल मंचन हुआ। दर्शकों ने अभिनय की जमकर सराहना की।

Published by
Shivam Dixit


बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर आधारित हिंदी नाटक ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार’ का शनिवार शाम बेंगलुरु के येलहंका स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर भवन में सफल मंचन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शकों ने भाग लिया और नाटक को भरपूर सराहना मिली।

नागपुर के ‘नादब्रह्म नाट्य दल’ की शानदार प्रस्तुति

महाराष्ट्र के नागपुर से आए ‘नादब्रह्म नाट्य दल’ ने वरिष्ठ रंगकर्मी रवींद्र सहस्रबुद्धे के नेतृत्व में इस नाटक की अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुति दी। नाटक के माध्यम से दर्शकों के सामने डॉ. हेडगेवार के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके राष्ट्रवादी चिंतन, संगठन निर्माण की दृष्टि तथा समाज के प्रति उनके पूर्ण समर्पण को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण:

  • जीवंत अभिनय: वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश केखाले ने डॉ. हेडगेवार जी की भूमिका निभाई। उनके सशक्त और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
  • भावपूर्ण संवाद: मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद, भावाभिव्यक्ति और प्रस्तुति शैली ने दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा।
  • व्यापक उपस्थिति: कार्यक्रम में 500 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही। आयोजन स्थल पर राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

रविवार को न्यू होराइजन कॉलेज में होगा अगला मंचन

आयोजकों के अनुसार, इस प्रेरणादायी नाटक का एक और मंचन रविवार शाम बेंगलुरु के कडुबीसनहल्ली स्थित न्यू होराइजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग परिसर में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में संघ कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के शामिल होने की संभावना है।

सांस्कृतिक प्रस्तुति से बढ़कर राष्ट्र निर्माण का माध्यम

युवा पीढ़ी तक डॉ. हेडगेवार के जीवन-दर्शन, संगठनात्मक मूल्यों और राष्ट्रसेवा के संदेश को पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार यह नाटक देश के विभिन्न शहरों में पहले भी सफलतापूर्वक मंचित किया जा चुका है।

बेंगलुरु में भी इसे दर्शकों का उत्साहपूर्ण समर्थन और सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है, जिससे आयोजकों और कलाकारों का उत्साह काफी बढ़ा है। यह नाटक केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के मूल्यों और सामाजिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

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