
दिल्ली विधानसभा के बाहर सांकेतिक उपवास करते लोकतंत्र सेनानी
नई दिल्ली। लोकतंत्र सेनानी संघ (दिल्ली प्रदेश) के तत्वावधान में शुक्रवार को आपातकाल के 50 वर्ष के अवसर पर दिल्ली विधानसभा के समक्ष लोकतंत्र सेनानियों का सांकेतिक उपवास एवं जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश के 74 तथा हरियाणा से प्रदेश अध्यक्ष श्री महावीर भारद्वाज के नेतृत्व में आए 8 लोकतंत्र सेनानियों सहित बड़ी संख्या में सेनानियों और नागरिकों ने भाग लिया।
लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय सह-संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी श्री ओ. पी. बब्बर, दिल्ली प्रदेश के वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी श्री राजन धींगरा तथा श्री राजकुमार सपरा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन नेताओं ने लोकतंत्र सेनानियों की ओर से जन-जागरण अभियान तथा ज्ञापन-प्रस्तुतीकरण का नेतृत्व किया।
अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि 5 जून भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इसी दिन वर्ष 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पटना के गांधी मैदान से “संपूर्ण क्रांति” का आह्वान किया था। संपूर्ण क्रांति केवल सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था, बल्कि राजनीति, समाज, शिक्षा, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता, पारदर्शिता एवं जन-उत्तरदायित्व स्थापित करने का राष्ट्रीय अभियान था। इसी आंदोलन ने देशभर में लोकतांत्रिक चेतना का संचार किया और आगे चलकर आपातकाल के विरोध में हुए ऐतिहासिक जनसंघर्ष की आधारभूमि तैयार की।
अश्विनी चौबे ने कहा कि आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित की गई, प्रेस पर नियंत्रण स्थापित किया गया तथा हजारों लोकतंत्र-प्रेमी नागरिकों को कारावास में रखा गया। ऐसे समय में लोकतंत्र सेनानियों ने अदम्य साहस, त्याग और संघर्ष का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इस इतिहास से परिचित कराना तथा लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को राष्ट्रीय स्मृति में सुरक्षित रखना समय की मांग है।
ओ. पी. बब्बर, राजन धींगरा तथा राजकुमार सपरा ने भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए संघर्षों का स्मरण किया और कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का उद्देश्य किसी दल विशेष का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं के प्रति जन-जागरण को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम के उपरांत लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक एवं नागरिक संगठनों तथा जागरूक नागरिकों से प्राप्त 10,000 से अधिक हस्ताक्षरों से समर्थित ज्ञापन दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण उनके निजी सचिव ज्ञापन प्राप्त करने हेतु उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अगले सप्ताह मुख्यमंत्री से भेंट का समय निर्धारित कर इसकी सूचना प्रदान की जाएगी।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने भी लोकतंत्र सेनानियों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे दिल्ली के सभी लोकतंत्र सेनानियों से भेंट करना चाहते हैं तथा इसके लिए शीघ्र ही समय निर्धारित कर सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।
लोकतंत्र सेनानियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया जाता है, तो आगामी दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान जितने दिन विधानसभा का सत्र चलेगा, उतने दिन लोकतंत्र सेनानी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से विधानसभा के बाहर उपवास एवं जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
लोकतंत्र सेनानी संघ ने स्पष्ट किया कि उसका यह अभियान लोकतंत्र, संविधान, नागरिक स्वतंत्रताओं तथा लोकतंत्र सेनानियों के योगदान के प्रति राष्ट्रीय कृतज्ञता की भावना से प्रेरित है। संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इन मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगी।