इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व आयुक्त और संस्थापक ललित मोदी ने 2010 के कोच्चि फ्रेंचाइजी विवाद को लेकर फिर से बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि उस समय मामले में शामिल कुछ प्रभावशाली लोगों को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का संरक्षण मिला था, जिसकी वजह से पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो सकी।
क्या था कोच्चि IPL विवाद?
2010 में IPL की नई टीम कोच्चि के स्वामित्व और निवेश की संरचना को लेकर काफी सवाल उठे थे। बोली प्रक्रिया के दौरान टीम में किस-किस का पैसा लगा था, यह पारदर्शी नहीं था। आरोप लगा कि कुछ निवेशकों के राजनीतिक संबंध छिपाए गए थे। विवाद इतना बढ़ा कि तब केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। ललित मोदी कहते हैं कि उन्होंने उस समय पारदर्शिता के लिए कई सवाल उठाए थे, लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला। उल्टा बाद में उन्हें खुद निशाना बनाया गया।
ललित मोदी का मुख्य दावा
ललित मोदी का कहना है कि उस दौर में सत्ता के ऊपरी स्तर से कुछ लोगों को बचाने की कोशिश हुई। उन्होंने विशेष रूप से यह दावा किया कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, खासकर सोनिया गांधी का संरक्षण उन लोगों को मिला था। इसी वजह से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आ सके और विवाद की दिशा बदल गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए ताकि असली सच्चाई सामने आए। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई नया दस्तावेज या सबूत इस बार सार्वजनिक नहीं किया है।
उस समय क्या हुआ था?
कोच्चि टीम की बोली लगने के बाद स्वामित्व को लेकर सवाल उठे। कहा गया कि टीम में विदेशी निवेश और कुछ भारतीय व्यक्तियों के हित जुड़े थे, जिनके राजनीतिक कनेक्शन थे। विवाद बढ़ने पर BCCI और IPL प्रशासन में भी हलचल मची। ललित मोदी और BCCI के बीच मतभेद गहराए, जिसके बाद उन्हें IPL से बाहर कर दिया गया।
इस पूरे प्रकरण के बाद BCCI ने टीम स्वामित्व और निवेश से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया। नई व्यवस्थाएं बनाई गईं ताकि भविष्य में ऐसे छिपे हित न रह सकें।
कांग्रेस की तरफ से क्या कहना रहा है?
कांग्रेस और जुड़े नेताओं ने पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि IPL के विवादों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा और तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया। इस बार ललित मोदी के नए बयान पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बहरहाल ललित मोदी के ये दावे ऐसे समय में आए हैं जब पुराने राजनीतिक और खेल संबंधी मुद्दों पर फिर चर्चा हो रही है। उनके आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोई नया सबूत सामने आया तो यह क्रिकेट और राजनीति दोनों के लिए अहम हो सकता है।











