हर बार आग नई होती है, लेकिन लापरवाही की कहानी वही होती है। भारत में 1995 में डबवाली अग्निकांड से मालवीय नगर होटल अग्नि प्रकरण तक 17 बड़े घटनाक्रम देश के अलग अलग हिस्सों में हो चुके हैं। इनमें अधिकृत रुप से जारी आंकड़े बताते हैं कि इन 17 चुनिंदा अग्निकांड में 1189 लोग जान गंवा चुके हैं, जो कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की संख्या के मुकाबले दोगुणा से भी अधिक है। हर बार लगता कि निर्दोष लोगों की जान आग ने नहीं,बल्कि सिस्टम की लापरवाही ने ली है।
साल 1995 के डबवाली अग्निकांड की रिपोर्ट नेशनल व इंटरनेशनल मीडिया तक में प्रकाशित हुई थी। हर किसी को दहला देने वाले इस घटनाक्रम में अधिकांश मासूम बच्चों सहित कुल 446 की तड़प तड़प मौत हुई थी,यह संख्या और भी अधिक हो सकती थी, अगर वहां अशोक वडेरा जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता व अन्य जान को जोखिम में कर्तव्य न निभाते। इस ताजा घटनाक्रम के बीच वडेरा जी का अद्वितीय बलिदान स्मरण में आने के साथ प्रेरणा देता है।
23 दिसंबर 1995 के इस अग्निकांड में पत्रकार एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन नगर कार्यवाह अशोक वडेरा ने अपनी जान की परवाह किए बिना अनेक बच्चों और लोगों को बचाने का प्रयास किया और समाज सेवा और खबर की दुनिया से जुड़ा यह चेहरा खुद भीषण अग्नि की लपटों में खबर बन गया। वडेरा के बुरी तरह से झुलसे शव की पहचान तीन दिन बाद हाथ की अंगूठी से संभव हुई थी। सिस्टम भले लापरवाह हो,मगर जनता के बीच अशोक वडेरा जैसे आज भी कम नहीं और यह चेहरे एक बार फिर सामने आये 3 जून को 2026 के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के दौरान।
सवाल उठता है कि जनता जान भी गंवाएं और बचाने के लिए आगे भी आये, मगर सिस्टम इस तरह के घटनाक्रम पेश ना आए, उसके लिए क्या करेगा ? व्यवस्था बनाने के लिए कई तरह की एनओसी अलग अलग विभागों और केंद्रों से लेनी होती है,क्या यह विभाग चौकन्ने होते तो एक के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुए 17 चुनिंदा बड़े अग्निकांड सामने होते। हद की बात है कि 1189 लोग जान गंवा चुके हैं,हर बार मामला जांच कमेटियों और इनकी रिपोर्ट तक ही सीमित रहता है और व्यवस्था पुराने ढर्रे पर। जानकर ताज्जुब होता है कि यह 17 बड़े घटनाक्रम स्कूल, अस्पताल, सिनेमा, धर्मस्थल, मैरिज पैलेस, फैक्टरी, कोचिंग सेंटर, गेम जोन, होटल और मेला क्षेत्र में हुए।हर बार अधिकांश मामलों में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी सामने आई।
यह भी नहीं है कि केवल यह 17 मामले ही हैं, यहां सिर्फ उन चुनिंदा बड़े घटनाक्रम का उल्लेख है,जिनके आंकड़े हमें आसानी से उपलब्ध हैं,अन्य छोटे बड़े घटनाक्रम शेष तो अपने क्षेत्र की फाइलों में ही दफन हैं। हर बार अग्निकांड होने के बाद धुआं उठता है, शव निकलते हैं, जांच कमेटियां बनती है और फाइलों में जिम्मेदारियां पिघल कर इस साहब से उन साहब की मेज पर फैली रहती हैं। एक दिन पहले दिल्ली मालवीय नगर के होटल अग्निकांड की प्रारंभिक जांच में भवन सुरक्षा, लाइसेंसिंग और फायर सेफ्टी मानकों पर गंभीर सवाल उठे हैं। होटल मालिक की गिरफ्तारी के साथ दिल्ली के एक मंत्री ने इस श्रेणी के होटलों की सीलिंग और अन्य तरह की कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।
हर बार मन मसोस कर बात यही सामने आती है काश कुछ समय पहले जागे होते। खैर अब भी जाग गये तो भविष्य में इस तरह की लापरवाही से होने वाली मौतों का सिलसिला रुक सकता है,क्योंकि अधिकांश घटनाक्रमों में अवैध निर्माण, क्षमता से अधिक संचालन,फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी,पर्याप्त आपातकालीन निकास का अभाव,ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल,निरीक्षण एजेंसियों की विफलता और आपदा प्रबंधन में खामियां उजागर हुईं हैं। इन खामियों के कारण लगने वाली आग की लपटें तो कुछ मिनट जलती हैं, लेकिन सिस्टम की लापरवाही दशकों पहले से और दशकों बाद तक दिखती है।
देश के चुनिंदा 17 अग्निकांड और 1189 निर्दोष लोगों की मौत के आंकड़े बढ़ाते हैं पीड़ा
-23 दिसंबर 1995 को हरियाणा के मंडी डबवाली स्थित राजीव मैरिज पैलेस में डीएवी स्कूल के वार्षिकोत्सव के दौरान भीषण आग लगी थी, इसमें 446 लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 घायल हुए थे।
-13 जून 1997 को दिल्ली उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की जान गई थी
-6 अगस्त 2001 को एरवाडी मानसिक आश्रम अग्निकांड (तमिलनाडु) 28 मौतें हुई
-23 जनवरी 2004 को तमिलनाडु के श्रीरंगम मैरिज हॉल में विवाह समारोह के दौरान अग्निकांड 50 मौतें
-16 जुलाई 2004 को तमिलनाडु के कुंभकोणम स्कूल अग्निकांड 94 विद्यार्थियों की मौत
-15 सितंबर 2005 को बिहार की अवैध पटाखा फैक्टरी अग्निकांड 35 की जान गई
-10 अप्रैल 2006 को यूपी के मेरठ इंडिया ब्रांड कंज्यूमर फेयर (मेले के टेंट में आग) अग्निकांड में 64 की मौत हुई
-23 मार्च 2010 को पश्चिम बंगाल कोलकाता के स्टीफन कोर्ट बिल्डिंग अग्निकांड (कोलकाता) के बहुमंजिला भवन में आग और अपर्याप्त निकासी व्यवस्था से 42 लोगों की मौत हुई थी
-9 दिसंबर 2011 को कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में आगजनी ने 89 की जान ली
-5 सितंबर 2012 को तमिलनाडु की शिवाकाशी पटाखा फैक्टरी अग्निकांड में 38 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी
-10 अप्रैल 2016 केरल के पुट्टिंगल मंदिर अग्निकांड में 111 लोगों की मौत और 350 से अधिक घायल
-29 दिसंबर 2017 को मुंबई के कमला मिल्स आगजनी में 14 लोग मारे गए
-24 मई 2019 को गुजरात के सूरत स्थित कोचिंग सेंटर में आग लगने से 22 छात्रों की मौत हुई थी,जिनमें 14 से 22 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थी शामिल थे
-13 मई 2022 को दिल्ली मुंडका फैक्टरी आगजनी में 27 की जान गई
-25 मई 2024 को गुजरात राजकोट टीआरपी गेम जोन में 32 की जान गई
-18 मई 2025 को हैदराबाद गुलजार हौज अग्निकांड में 17 लोगों की जान गई
-3 जून 2026 को ताजा घटनाक्रम मालवीय नगर स्थित होटल में पेश आया,जिसमें 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है











