एक समय था जब पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक द्विवेदी के सामने रोजगार की कोई स्पष्ट दिशा नहीं थी। आज वही आधुनिक कृषि के दम पर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले अभिषेक द्विवेदी की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि खेती को व्यवसायिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक के साथ किया जाए तो यह किसी भी बड़े उद्योग से कम लाभदायक नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक अभिषेक भी अन्य किसानों की तरह खेतों में दवा और उर्वरक का छिड़काव मजदूरों के सहारे करते थे। इससे अधिक समय लगता था, लागत बढ़ती थी और फसलों पर दवाओं का समान रूप से छिड़काव नहीं हो पाता था। आज वह स्वदेशी कृषि ड्रोन की मदद से न केवल अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं, बल्कि अच्छी आय अर्जित कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी से मिली प्रेरणा
अभिषेक बताते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सामाजिक कार्यों और जनसेवा से जुड़े रहे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किसानों और कृषि नवाचारों से जुड़ी चर्चाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि भारत की असली ताकत गांव और कृषि क्षेत्र में है। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती की, लेकिन जल्द ही यह समझ लिया कि केवल पुराने तरीकों से अपेक्षित सफलता हासिल नहीं की जा सकती। इसके बाद उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रों और स्वदेशी ड्रोन तकनीक को अपनाना शुरू किया।
आधुनिक तकनीक ने बदली खेती की तस्वीर
अभिषेक ने अपने खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव शुरू किया। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि दवाओं का समान और सटीक वितरण भी संभव हुआ। पहले जहां बड़े क्षेत्र में छिड़काव के लिए कई मजदूरों और पूरे दिन की आवश्यकता पड़ती थी, वहीं अब कुछ ही घंटों में काम पूरा हो जाता है। ड्रोन तकनीक अपनाने से लागत में कमी आई, उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हुई और खेती अधिक लाभकारी बन गई। उनकी इस पहल ने आसपास के किसानों को भी नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया।
खेती के साथ बनाया सफल ब्रांड
अभिषेक ने केवल खेती तक स्वयं को सीमित नहीं रखा। उन्होंने कृषि आधारित एक वेबसाइट शुरू की और एक फर्म की स्थापना की, जिसके माध्यम से गाय का घी, अचार, सरसों का तेल, शहद व अन्य कृषि उत्पाद तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनका दावा है कि सभी उत्पाद शुद्ध और बिना मिलावट के तैयार किए जाते हैं, जिसके कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
सालाना 16 करोड़ रुपये का टर्नओवर
सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाते हुए अभिषेक ने अपने कृषि व्यवसाय का लगातार विस्तार किया। आज उनकी फर्म का वार्षिक टर्नओवर लगभग 16 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। वह बताते हैं कि कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारी समय-समय पर उनके फार्म का निरीक्षण करते हैं और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों की सलाह और वैज्ञानिक खेती के तरीकों ने उनके व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने
अभिषेक का मानना है कि आज की खेती केवल हल और बैलों तक सीमित नहीं रह गई है। ड्रोन, आधुनिक मशीनें, डिजिटल मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन जैसे नवाचार कृषि को एक सफल उद्यम में बदल सकते हैं। वह युवाओं से खेती को रोजगार का अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि एक आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि यदि युवा नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ खेती करें तो वे गांव में रहकर भी बड़े स्तर पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
बदल रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था
केंद्र सरकार की कृषि और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने वाली योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। केंद्र सरकार की एसएमएएम योजना के तहत किसानों को कृषि मशीनरी खरीदने के लिए 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है। आधुनिक मशीनों और तकनीकों के कारण कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं और किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। अभिषेक द्विवेदी की सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि दूरदृष्टि, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल किसानों बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने भविष्य को लेकर नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं।

















