उत्तरकाशी: करीब 5 दिनों से दायरा बुग्याल से लापता एमबीए की छात्रा बबीता पांडेय की खोज में आज छ सदस्यीय डीप डाइव टीम भी पहुंच गई, जो कि बुग्याल के आसपास की झीलों और खाइयों में बबीता की तलाश कर रही है।
डीएम उत्तरकाशी प्रशांत आर्य ने बताया कि पुलिस एसडीआरएफ के साथ-साथ आईटीबीपी के जवान भी लापता बबीता की खोज में जुटे हुए हैं। पुलिस ने उसके दोस्तों के साथ सख्ती से पूछताछ भी की है। उधर जिला पर्यटन अधिकारी के के जोशी ने बताया कि उनके द्वारा दायरा बुग्याल के लिए एक्सप्लोर उत्तरकाशी पोर्टल से ऑनलाइन परमिट जारी किए जाते हैं। बबीता और उसके मित्रों का परमिट जारी नहीं किया गया है।
बिना परमिट के गए थे ट्रेकिंग करने
जिस ट्रैकिंग एजेंसी ने परमिट जारी किया। उसमें अनंत नाम की जगह हरमनप्रीत, आराधना की जगह बबीता रवि के स्थान पर हरमन पाल सिंह लिखा गया है। यानि परमिट किसी के नाम से जारी हुआ और नाम बाद में बदले गए। इस मामले में ट्रेकिंग एजेंसी का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर लिखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक उत्तरकाशी पुलिस अब बबीता के दोस्तों के खिलाफ भी एफआईआर लिखने की तैयारी में है ।
रहस्यमय है दायरा बुग्याल
उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बसे बुग्याल देवताओं के आंगन माने जाते हैं। स्थानीय लोग यहाँ जूते उतारकर प्रवेश करते हैं। लेकिन जब इन्हीं पवित्र और संवेदनशील ठिकानों पर आधुनिक शौक, लापरवाही और नशे का दौर शुरू होता है, तो प्रकृति अपने सबसे क्रूर रूप का परिचय भी कराती है। दयारा बुग्याल ट्रेक पर बबीता का अचानक गायब हो जाना महज़ एक ट्रेकर का रास्ता भटकना नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे की कड़ियाँ उस रात की धुंध में छिपी हैं, जहाँ दोस्ती, शराब और पहाड़ के कठोर नियम आपस में टकरा रहे थे।
क्या कोई आपसी विवाद हुआ?
शराब अक्सर दबे हुए गुस्से या विवादों को हवा देती है। क्या उस रात दोस्तों के बीच कोई अनबन हुई थी? क्या नशे की हालत में बबीता गुस्से या डर में कैंप से दूर चली गई? या फिर इस गुमशुदगी के पीछे कोई ऐसी साज़िश है जिसे ‘हादसे’ का नाम देने की कोशिश की जा रही है? जब तक ठोस सबूत सामने नहीं आते, तब तक उन दोस्तों की भूमिका पर सवाल उठना तय है जो होश खोकर बबीता को सुरक्षित रखने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी भूल गए?
प्रकृति इंसानों को गायब नहीं करती
एक ट्रेकर के नजरिए से देखें, तो प्रकृति इंसानों को गायब नहीं करती, इंसान खुद गलतियाँ करता है। बबीता पहाड़ों की क्रूरता से ज्यादा अपनों की लापरवाही या साज़िश का शिकार हुई लगती है। अगर वह सिर्फ रास्ता भटकती, तो इतने बड़े सर्च ऑपरेशन में आज नहीं तो कल उसकी कोई न कोई चीज (ट्रेकिंग पोल, जूते के निशान) जरूर मिल जाते। उसका पूरी तरह से ‘गायब’ हो जाना इस बात का पुख्ता संकेत है कि या तो वह किसी ऐसी गहरी खाईं में समा गई है जहाँ इंसान की पहुँच नहीं है, या फिर उस रात के अंधेरे में किसी ने बहुत सोची-समझी साज़िश के तहत उसे गायब कर दिया?












