मनोरंजन की आड़ में 'दबंगई'? 'काला हिरण' फिल्म पर छिड़ा कानूनी संग्राम
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मनोरंजन की आड़ में ‘दबंगई’? ‘काला हिरण’ फिल्म पर छिड़ा कानूनी संग्राम

सलमान खान की कानूनी टीम ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ पर सीज एंड डिसिस्ट नोटिस भेज दिया। बिश्नोई समाज की आस्था और 1998 के काला हिरण शिकार मामले पर बनी फिल्म को लेकर छिड़ा घमासान।

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप — edited by कुलदीप सिंह
Jun 2, 2026, 01:38 pm IST
inमनोरंजन
Kala Hiran controversy

काला हिरण पर छिड़ी कानूनी जंग

भारतीय सिनेमा के पर्दे पर यथार्थ और कल्पना का द्वंद्व पुराना है, लेकिन जब यथार्थ में किसी समाज की अटूट आस्था और दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई शामिल हो, तो विवाद होना स्वाभाविक है। वर्तमान में देश भर में सनसनी फैला रही फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ इसी तरह के एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है । इस फिल्म को लेकर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की कानूनी टीम ने निर्माता अमित जानी और कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक विस्तृत ‘सीज एंड डिजिस्ट’ नोटिस भेजा है, जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

उल्लेखनीय है कि सलमान खान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल द्वारा भेजे गए इस नोटिस में फिल्म के निर्माण, प्रचार और रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। नोटिस में तर्क दिया गया है कि फिल्म अभिनेता के ‘व्यक्तित्व अधिकारों’ निजता और प्रचार के अधिकारों का घोर उल्लंघन है। सलमान खान की टीम का मुख्य आक्षेप यह है कि चूंकि काला हिरण शिकार का मूल मामला अभी भी राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस विषय पर फिल्म बनाना न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप और ‘मीडिया ट्रायल’ को बढ़ावा देने जैसा है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि फिल्म निर्माता अभिनेता की तीन दशकों की साख और प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। अभिनेता की ओर से फिल्म निर्माताओं को 24 घंटे के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और सभी प्रचार सामग्री हटाने की चेतावनी दी गई है।

इसे भी पढ़ें: हिमाचल प्रदेश: स्थानीय निकाय चुनाव में उम्दा प्रदर्शन करके भाजपा ने रखी 2027 विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत की नींव 

बिश्नोई समाज की आस्था और 1998 का काला अध्याय

इस पूरे विवाद की जड़ें 1998 के उस काले अध्याय में छिपी हैं, जब जोधपुर के कांकाणी गांव में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान दो काले हिरणों के शिकार का आरोप लगा था। यह केवल एक जीव की हत्या का मामला नहीं था, बल्कि बिश्नोई समाज की धार्मिक संवेदनाओं का प्रश्न था। बिश्नोई समुदाय काले हिरण को अपने गुरु जाम्भोजी का पवित्र अवतार मानता है । इस समाज के लिए प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा करना उनके धर्म के 29 नियमों में सर्वोपरि है।

अब सवाल यह उठता है कि भारत का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और विश्वास के साथ जीने का अधिकार देता है। ऐसे में जब किसी की आस्था पर सवाल उठाए जाएँ या उसे आहत करने वाले कार्य किए जाएँ, तो उन मुद्दों को उठाना आखिर गलत कैसे माना जा सकता है? दूसरा प्रश्न काले हिरण शिकार मामले को लेकर है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम सत्य का निर्धारण अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। मुकदमे के निष्कर्ष से यह स्पष्ट होगा कि शिकार के लिए कौन जिम्मेदार था? लेकिन यह तथ्य तो निर्विवाद है कि काले हिरण का शिकार हुआ था। इसलिए इस घटना का उल्लेख करना या उस पर चर्चा करना अपने-आप में कोई असत्य या भ्रामक बात कैसे हो गई?

फिल्म निर्माता अमित जानी का दावा है कि उनकी फिल्म इसी ‘लेगेसी’ और न्याय की लड़ाई को दिखाएगी । फिल्म में 1998 की घटना, अभिनेता की गिरफ्तारी, कोर्टरूम ड्रामा और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ हालिया विवादों को भी सिनेमाई रूप में पिरोया गया है।

निर्माता का अडिग संकल्प: ‘डराया नहीं जा सकता’

नोटिस मिलने के बाद निर्माता अमित जानी ने पीछे हटने के बजाय अभिनेता पर ‘डराने-धमकाने’ का आरोप लगाया है । जानी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि सलमान खान नोटिस भेजकर उन लोगों को धमका रहे हैं जो इस फिल्म से जुड़े हैं, ताकि वे ग्लैमर के सामने आत्मसमर्पण कर दें। उन्होंने इसे सत्य की आवाज को दबाने की कोशिश करार दिया है।

निर्माता की टीम ने घोषणा की है कि वे किसी भी दबाव में फिल्म का काम नहीं रोकेंगे और 20 जून, 2026 को फिल्म का टीजर निर्धारित समय पर ही रिलीज किया जाएगा। फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के संभल और मुरादाबाद जैसे शहरों में पूरी की जा चुकी है। बता दें कि काला हिरण मामला केवल एक कानूनी केस नहीं, बल्कि एक मूक जीव के प्रति न्याय और एक जागरूक समाज की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जबकि अभिनेता की कानूनी टीम इसे प्रतिष्ठा का हनन बता रही है, फिल्म के समर्थक इसे एक ऐतिहासिक घटना के ईमानदार चित्रण के रूप में देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या न्यायालय इस फिल्म के प्रदर्शन को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के दायरे में मानता है या ‘विचाराधीन मामले में हस्तक्षेप’ के आधार पर इस पर अंकुश लगाता है। फिलहाल, ‘काला हिरण’ के पोस्टर ने मनोरंजन जगत से लेकर कानूनी गलियारों तक एक ऐसी सनसनी पैदा कर दी है, जिसे शांत करना आसान नहीं होगा।

Topics: काला हिरण विवादसलमान खान ने काला हिरण फिल्म पर नोटिस क्यों भेजाकाला हिरण फिल्मसलमान खान काला हिरण फिल्म
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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