खाड़ी संकट के बीच इजरायल और हिजबुल्लाह के मध्य लगातार युद्ध चल रहा है। इसी क्रम में इजरायली सैनिकों ने 26 साल में लेबनान को सबसे गहरी चोट देते हुए लेबनान के दक्षिणी इलाके में एक रणनीतिक किले पर कब्जा कर लिया है। यह किला बीफोर्ट कैसल (क़लात अल-शाकिफ) के नाम से जाना जाता है। लेबनान के प्रधानमंत्री ने इसे इजरायल की ‘जमीन जला दो’ वाली नीति बताया है, जबकि दोनों तरफ से हमले जारी हैं।
बीफोर्ट कैसल पर कब्जा
इजरायली रक्षा मंत्री ने बताया कि उनके सैनिकों ने दिन भर की लड़ाई और हवाई हमलों के बाद इस चट्टानी किले पर कब्जा कर लिया। यह किला 1982 से 2000 तक इजरायल के कब्जे में रहा था। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि यह ऑपरेशन हिजबुल्लाह की सुविधाओं को नष्ट करने और इलाके पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए किया गया।
IDF पहले लितानी नदी तक इलाके पर काबू रखता था, लेकिन अब सैनिक ज़हरानी नदी की तरफ बढ़ रहे हैं, जो करीब 6 मील (लगभग 10 किलोमीटर) उत्तर में है। किले पर इजरायली और गोलानी ब्रिगेड के झंडे लहराते दिख रहे हैं। आसपास के पहाड़ों में गोलाबारी की आवाजें गूंज रही हैं और धुआं उठ रहा है।
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नबातिएह की तरफ बढ़ते कदम
इजरायली सेना अब नबातिएह शहर को घेरने की तैयारी में दिख रही है। नबातिएह लेबनान के दक्षिण का आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र है। कई लोग इसे प्रतिरोध का प्रतीक मानते हैं। हाल के दिनों में इजरायली फोर्सेज ज़ावतार अल-शारकिया और मायफादौन जैसे कस्बों को पार कर चुके हैं और चुकाइन की तरफ बढ़ रहे हैं। वहां के लोगों को शनिवार को निकल जाने को कहा गया था।
लेबनान का आरोप
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने शनिवार को इजरायल पर आरोप लगाया कि वह दक्षिण में ‘जमीन जला दो’ वाली नीति और सामूहिक सजा दे रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल पूरे-पूरे कस्बों और गांवों को नष्ट कर रहा है और लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर कर रहा है। सलाम ने तुरंत और असली युद्धविराम की मांग की। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों से इजरायल को न सुरक्षा मिलेगी और न स्थिरता।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने इजरायल की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया और कहा कि लेबनान में सैन्य अभियान बढ़ाना और गहरी कब्जे वाली नीति कुछ भी सही नहीं ठहरा सकती।

















