आज अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस है। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र दो भारतीय शांति सैनिकों को मरणोपरांत डैग हैमरशोल्ड पदक से सम्मानित करेगा। ये सम्मान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस देंगे। साथ ही, भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बरक को भी 2025 वर्ष का सर्वश्रेष्ठ सैन्य लैंगिक अधिवक्ता पुरस्कार दिया जाएगा।
कौन से सैनिकों को मिल रहा है सम्मान?
लांस हविलदार हरभजन सिंह कांगो में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (MONUSCO) के साथ तैनात थे। उन्होंने ड्यूटी के दौरान अपना जीवन गंवाया। नायब सूबेदार सुजीत कुमार प्रधान दक्षिण सूडान में दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) के साथ थे। वे भी शांति मिशन में अपनी जान दे बैठे।
दोनों को मरणोपरांत डैग हैमरशोल्ड पदक मिलेगी। यह मेडल उन शांति सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने ड्यूटी पर आखिरी सांस तक अपना फर्ज निभाया।
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मेजर अभिलाषा बरक को मिलने वाला सम्मान
मेजर अभिलाषा बरक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। वे फिलहाल लेबनान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के साथ तैनात हैं। वहां वे महिला सहभागिता दल (FET) की कमांडर के रूप में काम कर रही हैं।
उन्हें यह अवॉर्ड महिलाओं की सशक्तिकरण और जेंडर संवेदनशीलता पर उनके काम के लिए दिया जा रहा है। मेजर बरक इस सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय महिला हैं। इससे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है।
भारत की शांति मिशनों में भूमिका
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति बलों का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता देश है। अभी 4,200 से ज्यादा भारतीय सैनिक और पुलिसकर्मी अलग-अलग मिशनों में काम कर रहे हैं। इनमें 155 महिलाएं भी शामिल हैं। ये सैनिक अबेई, साइप्रस, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ द कांगो, लेबनान, सोमालिया, दक्षिण सूडान और पश्चिमी सहारा जैसे इलाकों में तैनात हैं।
दुनिया भर में 50,000 से ज्यादा सिविलियन, सैन्य और पुलिस शांति सैनिक इन मिशनों में सेवा दे रहे हैं। ये जगहें दुनिया के सबसे मुश्किल और जटिल इलाके माने जाते हैं। भारत की ओर से अब तक करीब 180 शांति सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। यह संख्या किसी भी दूसरे देश से ज्यादा है।











