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वीर सावरकर पर विवाद क्यों बढ़ा? जानिए कोर्ट की टिप्पणी और ऐतिहासिक तथ्य

प्रतिपक्ष के नेता राहुल गाँधी एवं महापुरुषों के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी करने वाले राजनेताओं व तथाकथित बुद्धिजीवियों को यदि शर्म आती तो वे निश्चित ऐसी टिप्पणियों से बचते।

Written byप्रणय कुमारप्रणय कुमार — edited by Mahak Singh
May 28, 2026, 04:20 pm IST
inभारत
वीर सावरकर जी

वीर सावरकर जी

प्रतिपक्ष के नेता राहुल गाँधी एवं महापुरुषों के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी करने वाले राजनेताओं व तथाकथित बुद्धिजीवियों को यदि शर्म आती तो वे निश्चित ऐसी टिप्पणियों से बचते। मगर शर्म है कि इन्हें आती नहीं। गत वर्ष, 25 अप्रैल, 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को कड़ी फटकार लगाई थी।

स्वतंत्रता सेनानियों पर बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

न्यायालय ने राहुल गांधी को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे उन स्वतंत्रता-सेनानियों के विरुद्ध गैर-जिम्मेदाराना बयान न दें, जिन्होंने देश को आज़ादी दिलाई। न्यायालय ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे भविष्य में ऐसा कोई वक्तव्य देंगें तो न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई करेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सत्य से उनका साक्षात्कार कराते हुए कहा कि महात्मा गाँधी भी वायसराय को लिखे पत्र में “आपका वफादार सेवक” लिखते थे तो क्या इस आधार पर उन्हें अंग्रेजों का सेवक कहा जा सकता है या स्वतंत्रता-आंदोलन में उनके योगदान को कम करके आँका जा सकता है?

स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और ऐतिहासिक तथ्यों पर टिप्पणी

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने आगे कहा कि उन्होंने स्वयं देखा है कि कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश को  “आपका सेवक” लिखकर संबोधित करते थे। उन्होंने राहुल गांधी को यह भी याद दिलाया कि स्वयं उनकी दादी ने प्रधानमंत्री रहते हुए सावरकर की प्रशंसा में अनेक पत्र लिखे थे। यद्यपि राहुल गांधी इस सत्य से अपरिचित हों, ऐसा नहीं माना जा सकता। हाँ, यह अवश्य है कि वामपंथी प्रभाव में वे स्वयं अपनी दादी व कांग्रेस की रीति-नीति-परंपरा की लगातार उपेक्षा व अवमानना कर रहे हैं। कदाचित इसीलिए उन्होंने “भारत जोड़ो यात्रा” के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में वीर सावरकर पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें “अंग्रेजों का पेंशनभोगी व ब्रिटिश सरकार का नौकर” बताया था। तदनंतर शीर्ष अदालत ने राहुल गांधी को सचेत करते हुए ठीक ही कहा कि “जब उन्हें भारत के इतिहास-भूगोल के बारे में कुछ भी नहीं पता तो उन्हें ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।” वस्तुतः राहुल गांधी एवं आज के सभी नेताओं को स्वतंत्रता-सेनानी पर बोलते हुए यह सोचना और समझना होगा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सबने एकजुट होकर लड़ी थी। जाति, भाषा, प्रांत, पंथ, संप्रदाय जैसे विभेदकारी तत्त्वों से परे सभी स्वतंत्रता-सेनानियों ने मिल-जुलकर एक ही लक्ष्य के लिए काम किया तथा देश की स्वतंत्रता में अपने-अपने ढ़ंग से योगदान दिया।

 

यह भी पढ़ें- सावरकर की विचारधारा और आलोचना: इतिहास क्या कहता है?

स्वतंत्रता संग्राम के दस्तावेज़ों में सावरकर का उल्लेख

सावरकर के संदर्भ में एक और तथ्य उल्लेखनीय है। वह यह कि स्वतंत्रता के बाद काँग्रेस ने एक समिति का गठन किया था, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. पट्टाभि सीतारामय्या, डॉ एस. राधाकृष्णन, जय प्रकाश नारायण और विजयलक्ष्मी पंडित शामिल थीं। इस समिति के नेतृत्व में भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन पर एक पुस्तक – “To The Gates of Liberty” का प्रकाशन किया गया। प्रस्तावना जवाहरलाल नेहरू ने लिखी और सावरकर के भी दो लेखों “Ideology of the War Independence – Swadharma and Swaraj and ‘The Rani of Jhansi” को इसमें समाहित किया गया था। इस पुस्तक की एक विशेष बात यह भी थी कि इस समिति ने सावरकर के नाम के आगे ‘वीर’ विशेषण लगाया था।

वीर सावरकर के योगदान और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण पर विचार

स्मरण रहे कि गाँधी-हत्या के मिथ्या आरोपों से न्यायालय ने उन्हें ससम्मान बरी किया था। बल्कि तथ्य यह भी है कि गाँधी जी के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की चिंता को लेकर सावरकर स्वयं अत्यंत चिंतित एवं संवेदनशील थे। वे उनकी सुरक्षा के लिए तत्कालीन भारत सरकार को  समय-समय पर आगाह करते रहे थे। स्वतंत्र भारत के निर्माण में वे गाँधी जी की भूमिका एवं महत्ता को भी अपने समकालीन अन्य अनेक नेताओं से कहीं बेहतर समझते थे। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद भी उन्होंने ‘इदम न मम, इदम राष्ट्राय’ का जीवन जिया। कोई भी कृतज्ञ समाज एवं राष्ट्र मातृभूमि के ऐसे सच्चे एवं वीर सपूतों पर सदैव मान और गौरव रखता है। राष्ट्र उन्हें सदैव एक सच्चे देशभक्त, भावप्रवण कवि, यथार्थवादी चिंतक, दृष्टिसंपन्न इतिहासकार, कुशल रणनीतिकर एवं दूरदर्शी राजनेता के रूप में याद रखेगा। भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं यशस्वी प्रधानमंत्री में से एक स्वर्गीय श्री अटलबिहारी वाजपेयी जी के शब्दों में- ”सावरकर मने तेज, सावरकर मने तप, सावरकर मने त्याग, सावरकर मने तर्क, सावरकर मने तारुण्य!” उनके अनुसार ”सावरकर केवल एक व्यक्ति नहीं, विचार हैं; एक चिंगारी नहीं, अंगार हैं, वे सीमित नहीं, विस्तार हैं।”

Topics: Savarkar and Gandhi ThoughtsSavarkar controversySupreme Court Comment on SavarkarRahul Gandhi's Savarkar StatementVeer Savarkar History Freedom Fighter ControversyIndian Independence Struggle History
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