अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पहले से ही मुश्किल में थी और अब हालात और ज्यादा गंभीर होते नजर आ रहे हैं। इस टकराव का असर पूरे पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी ठिकाने पर जवाबी हमला
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बंदर अब्बास पोर्ट के पास हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमला किया है। ईरानी मीडिया एजेंसी तसनीम के अनुसार, यह कार्रवाई सुबह करीब 4:50 बजे की गई। IRGC का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई उस कथित अमेरिकी हमले के बाद हुई, जो बंदर अब्बास इलाके के पास हुआ था। हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया है कि उसने अमेरिका के किस सैन्य बेस को निशाना बनाया। इस वजह से अभी स्थिति को लेकर कई सवाल बने हुए हैं और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। IRGC ने अमेरिका को सख्त चेतावनी भी दी है। उसने कहा कि अगर ऐसे हमले फिर हुए तो ईरान कड़ा जवाब देगा और किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी हमलावर की होगी।
इस बीच, तनाव का असर आसपास के देशों पर भी पड़ने लगा है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि देश की ओर आने वाले किसी भी खतरे को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इससे साफ है कि यह मामला अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर असर डाल रहा है। इससे पहले भी ईरान में कई धमाकों और हवाई हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने भी कुछ ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिन्हें वह अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण खाड़ी क्षेत्र में तनाव बहुत बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है और इसका असर पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।











