मुंबई | मायानगरी मुंबई की प्रसिद्ध जहांगीर आर्ट गैलरी में कला और अध्यात्म का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। अवसर था जाने-माने कलाकार जैन कमल की विशेष चित्रकला प्रदर्शनी ‘विश्व शांति के लिए णमोकार महामंत्र’ के उद्घाटन समारोह का। इस भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी के कर कमलों द्वारा किया गया।
उद्घाटन के पश्चात उपस्थित कला प्रेमियों और प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए श्री होसबाले ने कहा कि ‘णमोकार मंत्र’ केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि विश्व में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला एक सार्वभौमिक मंत्र है। यह संपूर्ण मानवता को सकारात्मकता और आंतरिक शांति प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम है।
“अक्षर कभी ‘क्षर’ (नष्ट) नहीं होते, मंत्र शाश्वत हैं”
कलाकार जैन कमल के उत्कृष्ट कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए सरकार्यवाह जी ने कहा कि कमल जी ने णमोकार मंत्र को विभिन्न लिपियों और कलात्मक स्वरूपों में इस तरह प्रस्तुत किया है कि यह केवल एक चित्र नहीं, बल्कि साक्षात सृष्टि का रूप ले चुका है।
“कला केवल एक दृश्य अनुभव नहीं है, बल्कि यह आत्मा को भीतर तक स्पर्श करने वाली गहरी साधना है। यह प्रदर्शनी बाहरी संसार से अंतर्मन की यात्रा का सीधा अनुभव कराती है। भारतीय संस्कृति में ‘अक्षर’ और ‘मंत्र’ केवल शब्द या ध्वनि नहीं, बल्कि शाश्वत चेतना के प्रतीक हैं। ‘अक्षर’ इसलिए अक्षर कहलाते हैं क्योंकि वे ‘क्षर’ अर्थात नष्ट होने वाले नहीं होते।” – दत्तात्रेय होसबाले
उन्होंने आगे बताया कि भारतीय ऋषि केवल वर्तमान को नहीं देखते थे, वे भूत, वर्तमान और भविष्य का समग्र दर्शन करने वाले “दृष्टा” थे। उन्हीं की दिव्य अनुभूति से मंत्र प्रकट हुए, जो कालातीत और अविनाशी हैं।
आपातकाल और बेंगलुरु जेल का वह संस्मरण
णमोकार महामंत्र की असीम शक्ति और इसके व्यापक प्रभाव को स्पष्ट करते हुए श्री होसबाले ने आपातकाल (Emergency) और जयप्रकाश नारायण (JP) आंदोलन के समय का एक भावुक संस्मरण भी साझा किया।
उन्होंने बताया कि उस दौर में बेंगलुरु जेल में विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के बंदी एक साथ बंद थे। वहां वे सभी नियमित रूप से णमोकार मंत्र का सामूहिक जाप किया करते थे। इस महामंत्र के प्रभाव से जेल के भीतर बंदियों के बीच अद्भुत एकता, असीम आत्मबल और सद्भाव की भावना विकसित हुई थी।
पंचपरमेष्ठियों को नमन और षडरिपुओं पर विजय
दत्तात्रेय होसबाले जी ने स्पष्ट किया कि णमोकार मंत्र किसी व्यक्ति विशेष की उपासना का मंत्र नहीं है, बल्कि यह पंचपरमेष्ठियों के महान गुणों को नमन करता है।
मंत्र की आध्यात्मिक शक्ति:
- यह मंत्र अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु— इन पाँच महान आध्यात्मिक स्वरूपों की वंदना करता है।
- यह मनुष्य को अपने भीतर के षडरिपुओं (छह शत्रुओं)— काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त करने की शक्ति देता है।
- यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और व्यक्ति को योगस्वरूप बनने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कलाकार जैन कमल जी के इस पुनीत कार्य के प्रति समाज की कृतज्ञता व्यक्त की और मंगलकामना की कि गुरुओं और अरिहंतों की कृपा से उनकी यह साधना निरंतर ऐसे ही आगे बढ़ती रहे।
सामूहिक शक्ति से होगा विश्वकल्याण
इस गरिमामयी अवसर पर कलाकार जैन कमल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनकी इस प्रदर्शनी की प्रत्येक कलाकृति दर्शकों को एक नया, सकारात्मक और विशिष्ट अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से सृजित की गई है।
वहीं, कार्यक्रम में उपस्थित जैन मुनि नयपद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज ने सभा को आशीर्वचन देते हुए कहा, “णमोकार महामंत्र आत्मिक शुद्धि का सबसे बड़ा माध्यम है। जब सामूहिक शक्ति और आध्यात्मिक साधना एक साथ मिलती है, तो यह मानवता की रक्षा और विश्वकल्याण में बहुत बड़ा योगदान दे सकती है।”

















