जलवायु परिवर्तन का बुरा असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। एल नीनो के कारण मौसम में लगातार परिवर्तन हो रहा है औऱ भारत में इस बार सुपर एल-नीनो का असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों और मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, प्रशांत महासागर में हो रही गर्मी के कारण देश के कई हिस्सों में भारी गर्मी, सूखा और कुछ जगहों पर अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
क्या है सुपर एल-नीनो?
एल-नीनो वह स्थिति है जब प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। जब यह बहुत ज्यादा ताकतवर होता है तो उसे सुपर एल-नीनो कहते हैं। इस बार इसका असर 2025-26 में सबसे ज्यादा दिख सकता है। पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक, सुपर एल-नीनो वाले सालों में भारत में मौसम का मिजाज काफी बदल जाता है।
भारत पर क्या होगा असर?
गर्मी का बढ़ना: उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे इलाकों में लू और गर्मी और भी ज्यादा हो सकती है। दिन का तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच सकता है।
सूखा: मानसून कमजोर पड़ने की आशंका है। कुछ राज्यों में बारिश कम हो सकती है, जिससे फसलें प्रभावित होंगी और पानी की किल्लत बढ़ेगी।
बाढ़ का खतरा: वहीं, पूर्वी और दक्षिणी कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है, जिससे अचानक बाढ़ आ सकती है।
पहले ऐसा कब हुआ
पिछले सुपर एल-नीनो वाले वर्षों (1982-83, 1997-98) में भारत में सूखा पड़ा था। 2015-16 में भी इसी वजह से कई राज्यों में बारिश घटी और कृषि उत्पादन पर असर पड़ा। इस बार वैज्ञानिक इसे और भी मजबूत बता रहे हैं।
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चौकन्नी है सरकार
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अन्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे सूखा सहन करने वाली फसलें बोएं और पानी का सही प्रबंधन करें। जल संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।
कहां कहां पड़ेगा असर
उत्तर और उत्तर-पश्चिम: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली – गर्मी और सूखे का सबसे ज्यादा खतरा।
मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ – अनियमित बारिश।
पूर्वी और दक्षिण: कुछ राज्यों में ज्यादा बारिश और बाढ़ की संभावना।
क्या करें आम लोग?
- गर्मी से बचाव के लिए दोपहर में बाहर निकलने से बचें, खूब पानी पिएं।
- किसान भाई मौसम की खबरें नियमित सुनें और फसल चक्र के हिसाब से बदलाव करें।
- पानी की बर्बादी रोकें, खासकर उन इलाकों में जहां सूखे की आशंका ज्यादा है।
















