देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज मैक्स हॉस्पिटल में निधन हो गया है। वे पिछले कुछ हफ्तों से अस्वस्थ्य चल रहे थे।
दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे श्री खंडूरी अटल सरकार में सड़क परिवहन मंत्री भी रहे। अपनी कड़क ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले श्री खंडूरी ने उत्तराखंड राज्य में राष्ट्रीय राज मार्गों की कल्पना को साकार किया था। उन्हें राज्य में पारदर्शी शासन व्यवस्था और 108 एम्बुलेंस सेवाएं जनता को समर्पित किए जाने के लिए भी याद किया जाता है। उन्होंने अपने शासन काल में लोकायुक्त बिल पास कराया था। श्रीखंडूरी के निधन के विषय में जानकारी उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधान सभा की अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण द्वारा दी गई है।
उनके निधन पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शोक प्रकट किया है ।
खंडूरी जी का संक्षिप्त परिचय
जन्म: 1 अक्टूबर 1934, देहरादून, उत्तराखंड
- माता-पिता: स्व. जय बल्लभ खंडूड़ी (पत्रकार) और स्व. दुर्गा देवी खंडूड़ी (समाज सेविका)
- पत्नी: अरुणा खंडूरी
- संतान: बेटा मनीष खंडूड़ी, बेटी रितु खंडूड़ी भूषण. रितु खंडूड़ी भूषण वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष हैं।
शिक्षा
- B.Sc. – इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, 1951-1953
- B.E. (Civil) – कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, पुणे, 1957-59
- Post Graduate – डिफेंस मैनेजमेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद
- अन्य M.I.E. (India), इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, नई दिल्ली 9837
सेना करियर: 1954-1991
खंडूरी भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में 1954 में शामिल हुए और 1991 में मेजर जनरल के पद से रिटायर हुए। 9837
प्रमुख पद:
1. 1971 भारत-पाक युद्ध: रेजिमेंट कमांडर
2. चीफ इंजीनियर इन द आर्मी
3. इंजीनियरिंग ब्रिगेड के कमांडर
4. आर्मी हेडक्वार्टर में एडिशनल मिलिट्री सेक्रेटरी 9837
सम्मान: 1983 में राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) मिला 9837
राजनीतिक सफर
सेना से रिटायर होने के बाद 1991 में राजनीति में आए। वह गढ़वाल लोकसभा सीट से 1991, 1998, 1999, 2004, 2014 में सांसद चुने गए थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 2000-2003 ( सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 2003-मई 2004 (कैबिनेट मंत्री) रहे। उनकी उपलब्धियों पर नजर डालें तो उन्होंने गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और नॉर्थ-साउथ, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जैसी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं लागू की थीं। इसीलिए इन्हें “सड़क वाले खंडूड़ी” भी कहा जाता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर उनका पहला कार्यकाल 8 मार्च 2007 से 23 जून 2009 और दूसरा कार्यकाल 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 का रहा।












