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कन्वर्जन के प्रयासों के कारण जनजातीय संस्कृति को खतरा, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

ओडिशा- छत्तीसगढ सीमा पर स्थित जनजातिबहुल जिला मालकानगिरि में स्थानीय जनजातीय लोगों को अपने मूल से काट कर ईसाइयत में कन्वर्ट कराने वाले लोगों की सक्रियता बढ गई है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
May 18, 2026, 04:37 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर। ओडिशा-छत्तीसगढ सीमा पर स्थित जनजातिबहुल जिला मालकानगिरि में स्थानीय जनजातीय लोगों को अपने मूल से काट कर ईसाइयत में कन्वर्ट कराने वाले लोगों की सक्रियता बढ गई है। ईसाई पादरियों व अन्य मिशनरी संस्थाओं से जुडे लोंगों के इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में गहरा रोष देखा जा रहा है। आम तौर पर शांत रहने वाले जनजातीय लोगों में इन गतिविधियों के खिलाफ इतना रोष देखा जा रहा है कि वे प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन देकर ईसाई पादरियों व मिशनरी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

इस तरह की एक घटना मलकानगिरि जिले के कालीमेला ब्लॉक अंतर्गत मांगीपली गांव में देखने को मिली है जिसमें ग्रामीणों ने प्रशासन से इस बारे में गुहार लगाया है। गांव के कई प्रमुख लोगों ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। पूर्व विधायक मुकुंद सोडी , पूर्व सरपंच देव माडकामी सहित कई ग्रामीण प्रतिनिधि इस संबंध में ज्ञापन उपजिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहीं पल्लवी खरा को सौंपा । जानकारी के अनुसार, मालकानगिरि जिले के कालिमेला प्रखंड के वेंकटपलम पंचायत के मांगीपाली गांव में कुल 250 परिवार और लगभग एक हजार लोग निवास करते हैं।

ईसाई मिशनरियों के प्रयास से गांव के कुछ गिने चुने लोग कन्वर्ट हो गये हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ परिवारों द्वारा ईसाई मजहब स्वीकार करने के बाद अब पूरे जोर शोर से अन्य लोगों को कन्वर्जन कराने के लिए गतिविधियां बढ़ रही हैं जिससे गांव की पारंपरिक संस्कृति, पूजा-पद्धति और सामाजिक परंपराओं पर प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी क्षेत्रों और अन्य भाषायी समुदायों से लोगों को गांव में आ रहे हैं। वे गांवों में आकर प्रार्थना सभाएं एवं मजहबी कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसके साथ ही ये लोग इन प्रार्थना सभाओं व अन्य मजहबी कार्यक्रमों में पारंपरिक जनजातीय आस्था, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक मान्यताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं।

इस तरह से ये लोग जनजातीय आस्था व प्रतीकों पर हमला कर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे है । इस कारण गांव में स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में कितने लोग ईसाई मजहब का पालन कर रहे हैं, इसका आधिकारिक रूप से सत्यापन किया जाए। साथ ही जन्म, मृत्यु, विवाह, युवतियों के वयस्क होने से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान, चैती पर्व, आमभाखिया, नुआखाई और अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किसी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। ज्ञापन में कहा गया है कि कि मलकानगिरि अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन संवैधानिक प्रावधानों और प्रचलित कानूनों के तहत कार्य करता है।

इस लिए प्रशासन इस बारे में आवश्यक कार्रवाई करे तथा जनजातीय पहचान को मिटाने के लिए किये जा रहे प्रयासों को रोकें । विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री सुधांशु पटनायक ने पांचजन्य से बात करते हुए कहा कि ईसाई मिशनरियां विभिन्न प्रकार के गैर कानूनी गतिविधियों के जरिये जनजातीय लोगों को अपने पूर्वजों की संस्कृति से काटने के प्रयास में लगी हुई हैं। यह केवल जनजातीय संस्कृति के प्रति ही खतरा नहीं है बल्कि देश के लिए भी गंभीर खतरा है । राज्य में गैर कानूनी तरीके से कनवर्जन को रोकने लिए कानून लागू है । लेकिन दुर्भाग्य से इस कानून का कडाई से अनुपालन नहीं किया जा रहा है । इस कारण ग्रामीणों को अपनी बात प्रशासन को पहुंचानी प़ड रही है । इसलिए राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कनवर्जन के कार्य में लगी शक्तियों के खिलाफ कडी कार्रवाई करे।

Topics: Religious Conversion in Tribal Areas odishaVillagers Demand Action Against ConversionThreat to Indigenous Tribal TraditionsConversion Attempts Create Tension in Tribal VillagesTribal Culture Under Threat in odisha
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