कॉर्बेट सिटी: रामनगर के सीतावनी क्षेत्र में आध्यात्मिक आस्था और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं अजय भट्ट के नेतृत्व में पहली भव्य श्रीजानकी कथा का आयोजन किया गया। मान्यता है की प्रभु राम का महल त्यागने के बाद सीता मैय्या वनवास के समय यहां ऋषि वाल्मीकि के साथ यहां आश्रम में रही थी और लव कुश का जन्म भी यहीं हुआ था।
सीतावनी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में सीतावनी आश्रम सदियों से स्थापित माना जाता है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों और क्षेत्रवासियों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस ऐतिहासिक आयोजन में मात्र 12 वर्षीय बाल व्यास वैदेहीनंदन वेदांत जी ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण वाचन से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। माता सीता के त्याग, तपस्या, मर्यादा और समर्पण से जुड़े प्रसंगों का उन्होंने अत्यंत सरल, मधुर और प्रभावशाली शैली में वर्णन किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम का आयोजन रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में किया गया। आयोजकों ने बताया कि कथा का उद्देश्य माता जानकी के आदर्श जीवन को जन-जन तक पहुंचाना, सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करना और नई पीढ़ी को नैतिक संस्कारों से जोड़ना है। इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट व विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन मंत्री आनंद हर्बोला ने सुबह अपने परिवार सहित कथा स्थल पहुंचे और पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि माता सीता भारतीय संस्कृति में त्याग, धैर्य और शक्ति की प्रतीक हैं तथा उनके जीवन से समाज को सदैव प्रेरणा मिलती रहेगी।
सीतावनी की पावन वादियों में आयोजित यह भव्य श्रीजानकी कथा श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का अनुपम उत्सव बन गई। इस अवसर पर कथा में संत श्री नमन कृष्ण शास्त्री जी महाराज, संत दूधिया बाबा जी, हनुमान धाम के महंत श्रीमान आचार्य विजय जी,कार्यक्रम संयोजक राकेश नैनवाल, सह संयोजक भूपेंद्र खाती, अतुल अग्रवाल, जिला पंचायत दीप चन्द्र आर्या,जिला पंचायत सदस्य राजेन्द्र सैनी, जिला पंचायत सदस्य कमल किशोर, बलदेव रावत, घनश्याम शर्मा, प्रेम आर्या, सत्यप्रकाश शर्मा, रामायण रिसर्च काउंसिल के महामंत्री सुशांत, ट्रस्टी राजेश सिंह, ट्रस्टी डॉ पीताम्बर मिश्रा आदि मौजूद रहे।












